Krishna Janmashtami 2019 पर रात्रि पूजन का विशेष महत्‍व है. कृष्‍ण  भक्‍त रात्रि में कृष्‍ण लला का जन्‍मोत्‍सव मनाते हैं. इसके पीछे कारण है कृष्‍ण जन्‍म. आप भी जानें पूर्ण कथा.

श्री कृष्ण जन्म कथा
द्वापर युग में जब पृथ्वी पर बोझ बढ़ने लगा तो उन्होंने श्री नारायण से गुहार लगाई. धरती मां की गुहार पर प्रभु ने उन्हें वचन दिया कि एक और अवतार लेंगे. और यहीं से शुरु होती है लीला प्रधान श्री कृष्ण के अवतार की कथा. वसुदेव नवविवाहित देवकी और कंस के साथ गोकुल जा रहे थे तभी एक आकाशवाणी हुई कि रे कंस! जिस बहन को इतने प्यार से तू लेकर जा रहा है उसके गर्भ का आठवां पुत्र तेरा काल होगा. इसके बाद कंस ने एक के बाद नंद और देवकी के सात पुत्र मार दिए और फिर अवतार लिया भगवान श्री कृष्ण का. इसी के उपलक्ष्य में हम जन्माष्टमी का त्यौहार मनाते हैं.

भादो महीने की आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में शंख, चक्र, गदाधारी भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया. उनके जन्म के समय उस कारागार की छठा भी स्वर्ग जैसी हो गई जहां वसुदेव और देवकी बंद थे. नारायण की यह लीला देखकर देवकी और वसुदेव अभिभूत हो गए. उसके बाद श्री कृष्ण ने वसुदेव को निर्देश दिए और बाल रूप में आ गए. इसके बाद कारागर में अद्भुत घटनाएं हुईं. वसुदेव की हथकड़ियां खुल गईं. सारे द्वार पाल सो गए. वसुदेव कृष्ण को उठाकर वृंदावन की ओर चल दिए.

रास्ते में यमुना पड़ती थी. वो भी भादो की उफनती यमुना. वसुदेव यमुना पार कर ही रहे थे कि माँ यमुना कृष्ण के चरण छूने के लिए मचल उठी. वसुदेव टोकरी को जितना ऊपर उठाते यमुना उतना ही ऊपर आती जाती. एक वक्त ऐसा आया जब वसुदेव के सर के ऊपर तक यमुना का जलस्तर बढ़ गया. इसके बाद श्रीकृष्ण ने अपना पैर नीचे लटका दिया और यमुना चरण छूकर सिमट गई.

आधी रात के अगले पहर वसुदेव महाराज नंद के घर पहुँचे और उनकी नवजात बच्ची को उठाकर उनकी जगह कृष्ण को रख दिया और वापस चले आए. वापस आकर कारागार का सारा दृश्य फिर पहले जैसा हो गया. उनकी हथकड़ियां लग गईं. पहरेदार जाग गए. आधी रात के तीसरे पहर जब कंस को पता चला कि देवकी के पुत्री पैदा हुई है तो वो कारागार आया लेकिन माया स्वरूपा कन्या का वो कुछ नहीं कर सका. उसके बाद कृष्ण की लीलाएँ चलती रही और एक दिन उन्होंने श्रीकृष्ण का वध कर दिया.