Krishna Janmashtami Quotes:  भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था. ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद मिश्र के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में अर्धरात्रि को हुआ था. इसलिए हर साल इसी मुहूर्त पर कान्हा का जन्मदिन बड़े धूमधाम से मनाया जाता है.

श्रीकृष्ण का जीवन मागदर्शन से भरा है. कहते हैं श्रीमद् भागवत गीता में श्रीकृष्ण के जिन उपदेशों का संग्रह किया गया है, उसे यदि कोई व्यक्ति पढ़ ले तो उसके मन के हर सवाल का जवाब मिल जाएगा.

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर हम आपके लिए श्रीमद् भागवत गीता के उन खास उपदेशों और वचनों को लेकर आएं, जिन्हें पढ़कर आपके जीवन में बदलाव जरूर आएगा.

Krishna Janmashtami 2018: कब मनाई जाएगी जन्माष्टमी, 2 या 3 सितंबर को? जानिये

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1. जीवन न तो भविष्य में है और ना ही अतीत में, जीवन तो बस इस पल में है.

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2. जो अपने मन को नियंत्रित नहीं करते, उनका मन ही उनका सबसे बड़ा शत्रु है.

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3. भय, राग द्वेष और आसक्ति से रहित मनुष्य ही इस लोक और परलोक में सुख पाते हैं.

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4. जो हुआ अच्छा हुआ, जो हो रहा है अच्छा हो रहा है, जो होगा वह भी अच्छा ही होगा, तुम भूत का पश्चाताप न करो.

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5. परिवर्तन संसार का नियम है.
जिसे तुम मृत्यु समझते हो, वही तो जीवन है.
एक क्षण में तुम करोड़ों के स्वामी बन जाते हो,
दूसरे ही क्षण में तुम दरिद्र हो जाते हो.
मेरा-तेरा, छोटा-बड़ा, अपना पराया, मन से मिटा दो,
फिर सब तुम्हारा है, तुम सबके हो.

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6. न यह शरीर तुम्हारा है और न तुम शरीर के हो.
यह अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश से बना है और इसी में मिल जाएगा.
पर आत्मा स्थिर है- फर तुम क्या हो.

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7. मन अशांत है और उसे नियंत्रित करना कठिन है, लेकिन अभ्यास से इसे वश में किया जा सकता है.

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8. लोग आपके अपमान के बारे में हमेशा बात करेंगे. सम्मनित व्यक्ति के लिए अपमान मृत्यु से बदतर है.

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9. अप्राकृतिक कर्म बहुत तनाव पैदा करता है.

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10. उससे मत डरो जो वास्तविक नहीं है, ना कभी था, ना कभी होगा. जो वास्तविक है, वो हमेशा था और उसे कभी नष्ट नहीं किया जा सकता.

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11. क्रोध से भ्रम पैदा होता है. भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है.
जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता है.
जब तक नष्ट होता है, तब तक व्यक्ति का पतन हो जाता है.

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12. सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता ना इस लोक में है और ना ही कहीं और.

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13. अपने अनिवार्य कार्य करो, क्योंकि वास्तव में कार्य करना निष्क्रियता से बेहतर है.

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14. मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है. जैसा वह विश्वास करता है, वैसा वो बन जाता है.

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15. नर्क के तीन द्वार हैं, वासना, क्रोध और लालच.

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16. व्यक्ति जो चाहे बन सकता है. यदि वह विश्वास के साथ इच्छित वस्तु पर लगातार चिंतन करे.

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17. किसी और का काम पूर्णता से करने से कहीं अच्छा है कि अपना काम करें, भले ही उसे अपूर्णता से करना पड़े.

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18. बुद्धिमान व्यक्ति को समाज कल्याण के लिए बिना आसक्ति के काम करना चाहिए.

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