लखनऊ: कुंभ 2019 का आगाज प्रयागराज में बस कुछ ही दिनों में होने वाला है. प्रयागराज दुनिया का एकमात्र ऐसा स्‍थान है, जहां पर तीन-तीन नदियां यानी गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्‍वती आकर मिलती हैं. इस पवित्र स्‍थान पर स्‍नान करने वालों पर ईश्‍वर की असीम कृपा बरसती है. ऐसे में अगर आप कुंभ आने का प्‍लान बना रहे हैं तो यह खबर आपके लिए महत्‍वपूर्ण है. त्रिवेणी संगम के अलावा प्रयागराज में कई ऐसे प्राचीन मंदिर और धार्मिक स्‍थल हैं, जहां पर आपको जरूर जाना चाहिए. इनमें से कुछ स्‍थान ऐसे हैं, जहां पर अगर आप गए तो समझ‍ लिजिए कि आपकी किस्‍मत के सितारे चमकने वाले हैं. तो आइये जानते हैं प्रयागराज के प्रमुख मंदिर और धार्मिक स्‍थलों के बारे में:-

Kumbh 2019: कुंभ में आने वाले नागा साधुओं के बारे में वो बातें, जिससे आप भी होंगे अंजान

मनकामेश्वर मंदिर
यमुना के तट पर सरस्वती घाट के पास स्थित यह मंदिर प्रयागराज के प्रसिद्ध शिव मंदिरों में से एक है. मनकामेश्वर महादेव की गिनती दुर्लभ ज्योतिर्लिगों में होती है. मान्यता है कि सतयुग में यह शिवलिंग स्वयं प्रकट हुए. भगवान शंकर कामदेव को भस्म करके यहां पर विराजमान हो गए. शिव पुराण, पद्म पुराण व स्कंद पुराण में इसका उल्लेख ‘कामेश्वर तीर्थ’ के नाम से है. त्रेता युग में भगवान राम वनवास को जाते समय जब प्रयाग आए तो अक्षयवट के नीचे विश्राम करके इस शिवलिंग का जलाभिषेक किया. कहा जाता है कि यहां सच्चे हृदय से आने वाले भक्तों की कामना स्वत: ही पूरी हो जाती है. मनकामेश्वर मंदिर के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती हैं. मंदिर परिसर में ऋण मुक्तेश्वर महादेव भी विराजमान हैं. ऐसी मान्यता है कि इसकी स्थापना त्रेतायुग में भगवान सूर्यदेव ने की. यहां सच्चे हृदय से 51 दिनों तक दर्शन-पूजन से पितृ, आर्थिक सहित हर तरह के ऋण से मुक्ति मिलती है.

Kumbh 2019: कुंभ स्‍नान के बहाने प्रयागराज की इन जगहों का भी करें भ्रमण, यादें रहेंगी ताजा

अक्षय वट
अक्षयवट इलाहाबाद में गंगा-यमुना संगम के पास क़िले के भीतर स्थित एक वृक्ष है. यह सनातन विश्ववृक्ष माना जाता है, इस वृक्ष का पुराणों में वर्णन है कि कल्पांत या प्रलय में जब समस्त पृथ्वी जल में डूब जाती है उस समय भी वट का एक वृक्ष बच जाता है जिसके एक पत्ते पर ईश्वर बालरूप में विद्यमान रहकर सृष्टि के अनादि रहस्य का अवलोकन करते हैं. अक्षय वट के संदर्भ कालिदास के रघुवंश तथा चीनी यात्री युवान्‌ च्वांग के यात्रा विवरणों में मिलते हैं. असंख्य यात्री इसकी पूजा करने के लिए आते हैं. काशी और गया में भी अक्षयवट है, जिनकी पूजा-परिक्रमा की जाती है. अक्षयवट को जैन भी पवित्र मानते हैं. उनकी परम्परा के अनुसार इसके नीचे ऋषभदेव जी ने तप किया था. यह बट का वृक्ष प्रयाग में त्रिवेणी के तट पर आज भी अवस्थित कहा जाता है.

Kumbh Mela 2019: बिना कपड़ों के भस्‍म रमाए क्‍यों घूमते हैं नागा साधु? किन कठिन नियमों पर जीते हैं?

बड़े हनुमान जी या लेटे हनुमान जी का मंदिर
इलाहबाद किले से सटा यह मंदिर लेटे हुए भगवान हनुमान की प्रतिमा वाला प्राचीन मंदिर है. इसमें हनुमान जी लेटी हुई मुद्रा में हैं. मूर्ति 20 फीट लम्बी है. जब बारीश में बाढ़ आती है तो मंदिर जलमग्न हो जाता है. इलाहाबाद का हनुमान मंदिर श्रद्धालुओं के साथ पर्यटकों के भी आकर्षण का केंद्र है. भक्तों का कहना है कि हर साल यहां गंगा जी हनुमान जी को स्नान कराने आती हैं.

Kumbh Mela 2019: इन 6 तिथियों पर करोड़ों श्रद्धालु करेंगे स्‍नान-दान, जानें क्‍यों माना जाता है शुभ…

संकटमोचन हनुमान मंदिर
प्रयागराज स्थित दारागंज मोहल्ले में गंगा जी के किनारे संकटमोचन हनुमान मंदिर है. यह कहा जाता है कि संत समर्थ गुरु रामदास जी ने यहां भगवान हनुमान जी की मूर्ति स्थापित की थी. शिव-पार्वती, गणेश, भैरव, दुर्गा, काली एवं नवग्रह की मूर्तियां भी मंदिर परिसर में स्थापित हैं. निकट में श्री राम जानकी मंदिर एवं हरित माधव मंदिर हैं.

भारद्वाज आश्रम
मुनि भारद्वाज से सम्बद्ध यह एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है. मुनि भारद्वाज के समय यह एक प्रसिद्ध शिक्षा केन्द्र था. कहा जाता है कि भगवान राम अपने वनवास पर चित्रकूट जाते समय सीता जी एवं लक्ष्मण जी के साथ इस स्थान पर आये थे. वर्तमान में वहां भारद्वाजेश्वर महादेव मुनि भारद्वाज, तीर्थराज प्रयाग और देवी काली इत्यादि के मंदिर हैं. निकट ही सुन्दर भारद्वाज पार्क एवं आनन्द भवन है.

Kumbh Mela 2019: कुंभ में कल्‍पवास का है विशेष महत्‍व, जानें क्‍या कहता है पद्म पुराण…

शंकर विमान मण्डपम
दक्षिण भारतीय शैली का यह मंदिर चार स्तम्भों पर निर्मित है. जिसमें कुमारिल भट्ट, जगतगुरु आदि शंकराचार्य, कामाक्षी देवी (चारों ओर 51 शक्ति की मूर्तियां के साथ), तिरूपति बाला जी (चारों ओर 108 विष्णु भगवान) और योगशास्त्र सहस्त्रयोग लिंग (108 शिवलिंग) स्थापित है.

पातालपुरी मंदिर
अकबर के किले में ही पातालपुरी मंदिर भी मौजूद है. काफी सीढ़ियों से नीचे उतर कर यहां दर्शन संभव होता है. इस मंदिर में गणेश, नरसिंह, शिवलिंग और गोरखनाथ समेत कई भगवान की प्रतिमाएं हैं. 1906 तक इस मंदिर के भीतर अंधेरा रहता था बाद में खिड़कियां बनाकर और लाइट की व्यवस्था की गई.

श्री अखिलेश्वर महादेव
चिन्मय मिशन के अधीन प्रयागराज (पूर्व में इलाहाबाद) में रसूलाबाद घाट के निकट 500 वर्ग फिट के लगभग एक क्षेत्र में श्री अखिलेश्वर महादेव संकुल फैला हुआ है. आधारशिला 30 अक्टूबर, 2004 को चिन्मय मिशन के परमपूज्य स्वामी तेजोमयनन्दजी एवं पूज्य स्वामी सुबोधानन्द जी के द्वारा रखी गयी थी. आधार तल से ऊपर राजस्थान से गुलाबी पत्थर मंगा कर कटाई की जा रही है और श्री अखिलेश्वर महादेव ध्यान मण्डपम को आकार प्रदान करने के लिये लगाये जा रहे हैं. आधार पर लगभग 300 व्यक्तिगण की क्षमता वाली एक सत्संग भवन हेतु निर्मित किया गया है और श्री अखिलेश्वर महादेव के लिये समस्त आवश्यक सेवायें उपलब्ध है

Kumbh 2019: कुंभ में ये अखाड़े लगाते हैं आस्‍था की डुबकी, जानें इनका पूरा इतिहास

दशाश्वमेघ मंदिर
यह दारागंज में गंगा नदी के किनारे स्थित शहर के तटीय क्षेत्रों में से एक है. कहा जाता है कि भगवान बह्मा जी ने यहां अश्वमेघ यज्ञ किया था. दशाश्वमेघेश्वर महादेव-शिवलिंग, नंदी, शेषनाग की मूर्तियां एवं एक बड़ा त्रिशूल मंदिर में स्थापित किये गये हैं. चैतन्य महाप्रभु की स्मृति में उनके पदचिन्हों की बिम्ब धारित करती हुई एक संगमरमर की पट्टी भी यहां लगी हुई है. इस मंदिर के निकट में ही देवी अन्नपूर्णा भगवान हनुमान एवं भगवान गणेश के मंदिर हैं.

सोमेश्वर मंदिर
तीर्थराज प्रयाग के यमुना तट पर स्थित प्राचीन भगवान शिव का सोमेश्वर नाथ मंदिर भी है. यमुना तट पर अरैल गांव में भगवान शिव की स्थापना चंद्रमा ने की थी. सोमेश्वर नाथ मंदिर की स्थापना के लिए स्वयं भगवान शिव ने चंद्रमा को स्थापित करने को कहा था,और उनके ही कहने पर चंद्रमा ने सोमेश्वर नाथ मंदिर की स्थापना की थी. मान्यता यह भी है कि इस मंदिर के आस पास अमृत की वर्षा होती है. साथ ही यहाँ मंदिर पर विराजित त्रिशूल की दिशा भी चन्दमा के साथ बदलती है. सोमेश्वर नाथ भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है.

तक्षकेश्वर नाथ मंदिर
तक्षकेश्वर भगवान शंकर का मंदिर है जो प्रयागराज की दक्षिण दिशा में स्थित दरियाबाद मोहल्ले में यमुना तट पर स्थित है. इससे थोड़ी दूर पर यमुना में तक्षकेश्वर कुंड है. जन श्रुति यह है कि तक्षक नाग ने भगवान कृष्ण द्वारा मथुरा से भगाये जाने के पश्चात् यहीं शरण ली थी.

Kumbh Mela 2019 Date: जानिये कब से शुरू हो रहा है कुंभ मेला, किन तारीखों को होगा शाही स्नान, देखें पूरी लिस्ट

कामेश्वर तीर्थ
अक्षयवट के पश्चिम में पिशाचमोचन मंदिर के समीप यमुना नदी के किनारे भगवान कामेश्वर का तीर्थ है, जिन्हें शिव का पर्याय माना जाता है. कहा जाता है जहां शिव होते हैं वहां निश्चित रूप से माता कामेश्वरी अर्थात पार्वती भी होती हैं. कामेश्वर और कामेश्वरी का तीर्थ स्थल होने के नाते यह स्थान श्रीविद्या की तांत्रिक साधना की दृष्टि से भी महत्व रखता है.

श्री वेणी माधव
पद्मपुराण में वर्णन के अनुसार लोकमान्यता है कि सृष्टीकर्ता ब्रह्मा जी प्रयागराज की धरती पर जब यज्ञ कर रहे थे तब उन्होंने प्रयागराज की सुरक्षा हेतु भगवान विष्णु से प्रार्थना कर उनके बारह स्वरूपों की स्थापना करवाई थी. प्रयागराज के बारह माधव मंदिरों में सर्वप्रसिद्ध श्री वेणी माधव जी का मंदिर दारागंज के निराला मार्ग पर स्थित है. मन्दिर में शालिग्राम शिला निर्मित श्याम रंग की माधव प्रतिमा गर्भगृह में स्थापित है. श्री वेणी माधव को ही प्रयागराज का प्रधान देवता भी माना जाता है. यहाँ वर्ष भर श्रधालुओं का ताँता लगा रहता है. श्री वेणी माधव के दर्शन के बिना प्रयागराज की यात्रा एवं यहाँ होने वाली पंचकोसी परिक्रमा को पूर्ण नहीं कहा जा सकता. चैतन्य महाप्रभु जी स्वयं अपने प्रयागराज प्रवास के समय यहाँ रह कर भजन-कीर्तन किया करते थे.

अलोपी देवी मंदिर
दारागंज मौहल्ले की रोड पर अलोपी देवी मंदिर है. इसका नाम देवी अलोपशंकरी के नाम पर रखा गया है. यहां किसी देवी की मूर्ति नहीं है बल्कि मंदिर के बीच में एक चबूतरा है जिसपर एक कुंड बना हुआ है. इसके ऊपर एक झूला है जो लाल कपड़े से ढका गया है. ऐसी भी मान्यता है कि मां सती की कलाई इसी स्थान पर गिरी थी. यह प्रसिद्ध शक्ति पीठ है.

धर्म से जुड़ी अन्य खबरों को पढ़ने के लिए धर्म पर क्लिक करें.