प्रयागराज: छोटी नदियों को बचाने के उद्देश्य से विभिन्न राज्यों से मुस्लिम महिलाएं इन नदियों का जल कलश लेकर कुंभ मेले में आईं और उन्होंने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद और स्वीडन से आए चित्रकार एके डगलस को इन कलशों को सौंपा. Also Read - निषाद समाज की टूटी नावों को देखने जा रही थीं प्रियंका गांधी, काफिले में घुसा भेड़ों का झुंड; डर गए चरवाहा गेंदा लाल

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‘छोटी नदी बचाओ अभियान’ के राष्ट्रीय संयोजक ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि छोटी नदियों की न्याय यात्रा कानपुर, फतेहपुर और कौशांबी होते हुए शुक्रवार सुबह कुम्भ मेला के सेक्टर छह स्थित छोटी नदियों के शिविर में पहुंची. उन्होंने बताया कि 108 छोटी नदियों का जल कलश इस शिविर में आया है. पचास से अधिक लोग खुद नदी का जल लेकर यहां पहुंचे जिसमें कई राज्यों से आईं मुस्लिम महिलाएं भी शामिल हैं. गंगा को साक्षी मानकर सभी ने छोटी नदियों की रक्षा का संकल्प लिया. Also Read - Haridwar Kumbh 2021: कुंभ में इस बार संगठित भजन-भंडारे नहीं होंगे, बुजुर्गों, प्रेग्नेंट महिलाओं, बच्चों के लिए बना ये नियम

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इनको सौंपा जाएगा जल कलश

सिंह ने बताया कि छोटी नदी बचाओ अभियान की तरफ से कुम्भ मेले में आये सन्तों, जलपुरुष राजेन्द्र सिंह, कथावाचकों, महामण्डलेश्वरों, शंकराचार्यों, अखाड़ों को नदी का कलश सौंपा जाएगा. नदी यात्रा के दौरान ली गईं नदी की वास्तविक तस्वीरें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को सौंपी जाएंगी.

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इन नदियों का जल लेकर पहुंचे

उन्होंने बताया कि जिन छोटी नदियों के जल कलश लाए गए हैं, उनमें उत्तर प्रदेश की पाण्डु नदी, ससुर खदेड़ी नदी, बकुलाही, सई नदी, गोमती, तमसा, सेंगर, रिन्द, बेतवा, केन, चन्द्रवल से लेकर जम्मू की तवी, डल झील, झारखंड की स्वर्ण रेखा नदी, मध्य प्रदेश की बिछिया, महारष्ट्र की मीठी नदी, आसाम से ब्रह्मपुत्र समेत 108 नदियों का जल शामिल है.

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जल संकट सबसे बड़ी चुनौती

शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानन्द ने कहा कि देश और दुनिया के सामने जल संकट बड़ी चुनौती के रूप में सामने खड़ा है. धरती के ऊपर और धरती के नीचे पानी खत्म हो रहा है. तेजी से पेड़ कट रहे हैं. इसलिए धरती को बुखार (ग्लोबल वार्मिंग) चढ़ने लगा है. उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के पीछे एक बड़ा कारण है देश की छोटी नदियों और ताल तलैया का सूख जाना और नदियों में सीवर का पानी छोड़ना.

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