Kumbh Mela 2019 का आगाज प्रयागराज में 15 जनवरी से होगा. इस मेले में लाखों की संख्‍या में श्रद्धालु पहुंचेंगे.

कुंभ में नहान का विशेष महत्‍व है. प्रयागराज दुनिया का एकमात्र ऐसा स्‍थान है, जहां पर तीन नदियां यानी गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्‍वती मिलती है.

Kumbh 2019: कुंभ स्‍नान के बहाने प्रयागराज की इन जगहों का भी करें भ्रमण, यादें रहेंगी ताजा

इस दौरान कल्‍पवास का विशेष महत्‍व होता है. पद्म पुराण में भी इसके महत्‍व के बारे में बताया गया है.

Kumbh 2019: प्रयागराज कुंभ के ये हैं मुख्य आकर्षण, मेले में आने से पहले जरूर पढ़ें…

kumbh 2019

क्‍या है कल्‍पवास
कुम्भ मेले के दौरान संगम तट पर कल्पवास का विशेष महत्व है. पद्म पुराण एवं ब्रह्म पुराण के अनुसार कल्पवास की अवधि पौष मास के शुक्लपक्ष की एकादशी से प्रारंभ होकर माघ मास की एकादशी तक है.

Kumbh 2019: जानिए कब से शुरू हो रहा कुंभ, प्रयागराज की महत्‍ता व स्‍नान की तारीख भी देखें

पद्म पुराण में महत्‍व
पद्म पुराण में महर्षि दत्तात्रेय ने कल्पवास की पूर्ण व्यवस्था का वर्णन किया है. उनके अनुसार कल्पवासी को इक्कीस नियमों का पालन करना चाहिए.

Kumbh 2019: कुंभ में ये अखाड़े लगाते हैं आस्‍था की डुबकी, जानें इनका पूरा इतिहास

ये नियम हैं –सत्यवचन, अहिंसा, इन्द्रियों का शमन, सभी प्राणियों पर दयाभाव, ब्रह्मचर्य का पालन, व्यसनों का त्याग, सूर्योदय से पूर्व शैय्या-त्याग, नित्य तीन बार सुरसरि-स्न्नान, त्रिकालसंध्या, पितरों का पिण्डदान, यथा-शक्ति दान, अन्तर्मुखी जप, सत्संग, क्षेत्र संन्यास अर्थात संकल्पित क्षेत्र के बाहर न जाना, परनिन्दा त्याग, साधु सन्यासियों की सेवा, जप एवं संकीर्तन, एक समय भोजन, भूमि शयन, अग्नि सेवन न कराना. जिनमें से ब्रह्मचर्य, व्रत एवं उपवास, देव पूजन, सत्संग, दान का विशेष महत्व है.
(kumbh.gov.in से साभार)

धर्म की और खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.