Kumbh Mela 2019: कुंभ में अब दो प्रमुख स्‍नान बाकी रहे गए हैं. यदि अभी तक आप ये पुण्‍य अर्जित नहीं कर सके हैं तो इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं. बाकी बचे दो स्‍नान 19 फरवरी को माघी पूर्णिमा और चार मार्च को महाशिवरात्रि के दिन है.

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कुंभ मेला क्षेत्र में हर रोज 20 से 25 लाख श्रद्धालु पुण्य की डुबकी लगा रहे हैं. यह सिलसिला मकर संक्रांति के दो दिन पहले से शुरू हुआ और लगातार बढ़ता जा रहा है. अचला सप्तमी और एकादशी पर 35 से 50 लाख श्रद्धालुओं ने संगम स्नान किया. हालांकि प्रमुख स्नान पर्व के बाद संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की संख्या में कुछ कमी आ रही है. लेकिन जैसे-जैसे कुम्भ मेला समापन की ओर बढ़ रहा है वैसे-वैसे संगम में आस्था की डुबकी लगाने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है. ऐसे में अगर आपने अभी तक कुंभ में डुबकी नहीं लगाई है तो इन दो मौका पर जरूर गंगा स्‍नान करने पहंचे.

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मकर संक्रांति से शुरू हुआ था स्‍नान
प्रयागराज में कुंभ 2019 का आगाज मकर संक्रांति के दिन हुआ था. जो कि चार मार्च तक चलेगा. कुंभ में हर रोज लाखों लोग आस्‍था की डुबकी लगा रहे हैं. इसमें सबसे महत्‍वपूर्ण अखाड़ा का स्‍नान होता है. बता दें कि शैव, वैष्णव और उदासीन पंथ के संन्यासियों के मान्यता प्राप्त कुल 13 अखाड़े हैं. पहले आश्रमों के अखाड़ों को बेड़ा अर्थात साधुओं का जत्था कहा जाता था. हालांकि पहले अखाड़ा शब्द का चलन नहीं था. साधुओं के जत्थे में पीर और तद्वीर होते थे. अखाड़ा शब्द का चलन मुगलकाल से शुरू हुआ. अखाड़ा साधुओं का वह दल है जो शस्त्र विद्या में भी पारंगत रहता है.

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