Kumbh Mela 2019: प्रयाग कुंभ का आगाज हो चुका है, ऐसे में अगर आप भी कुंभ जाने का मन बना रहे हैं तो कुंभ नगरी प्रयागराज में प्राचीनकाल से विराजमान अष्टनायकों के दर्शन जरूर करें. कुंभ में पवित्र संगम स्नान के साथ ही अष्‍टनायकों का दर्शन और पूजन कर किसी को करना चाहिए. पुराणों में भी अष्टनायकों के बारे में कहा गया है:-
त्रिवेणी माधवं सोमं भारद्वाजं च वासुकीम्‌
वन्दे अक्षयवटं शेषं प्रयागं तीर्थनायकम्.
इसका अर्थ है कि प्रयागराज के इन आठ श्रद्धा केंद्रों में त्रिवेणी, माधव, भारद्वाज, नागवासुकि, अक्षयवट, शेष भगवान और स्वयं तीर्थराज को शामिल किया गया है.

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अष्‍टनायकों के नाम
प्रथम नायक: त्रिवेणी संगम सिंहासन


यह पवित्र संगम गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती का मिलन स्थल है. वेद पुराण महाकाव्य और अन्य प्राचीन ग्रंथों में इस पवित्र तीर्थ की महिमा का उल्लेख है.

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द्वितीय नायक : माधव


प्रयागराज को विष्णु प्रजापति क्षेत्र और हरिहर क्षेत्र माना जाता है. भगवान शिव स्वयं इस क्षेत्र में निवास कर यहां वेणीमाधव की उपासना करते हैं तो दूसरी ओर प्रजापति ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना से पहले इस पवित्र क्षेत्र में दस अश्वमेध यज्ञ किए थे.

तृतीय नायक : सोमेश्‍वर महादेव

तीर्थराज प्रयाग के यमुना पार क्षेत्र में सोमेश्वर महादेव का मंदिर है. अरैल गांव के निकट इस मंदिर का पौराणिक महत्व है. पुराणों के अनुसार इस मंदिर में शिव विग्रह की स्थापना स्वयं चंद्रमा ने की थी.

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चतुर्थ नायक : भारद्वाज आश्रम


भारद्वाज आश्रम प्रयाग का महत्वपूर्ण मंदिर है. महर्षि भारद्वाज ज्ञान-विज्ञान, वेद पुराण, आयुर्वेद, धनुर्वेद और विमान शास्त्र के जानकार आचार्य थे. उनका गुरुकुल विद्या और शिक्षा का बहुत बड़ा केंद्र था.

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पंचम नायक : नागवासुकि
नागवासुकि का मंदिर दारागंज मोहल्ले के उत्तरी छोर पर गंगा के किनारे स्थित है. वासुकि नामक नाग शेषनाग के भाई हैं. भगवान शंकर और विघ्नहरण गणेश इन्हें अपने गले में माला की तरह धारण करते हैं.

षष्ठ नायक : अक्षय वट


यह संगम के निकट सबसे पवित्र स्थानों में से एक है. यह बरगद का बहुत पुराना पेड़ है जो प्रलयकाल में भी नष्ट नहीं होता. इस तरह के तीन और वृक्ष हैं- मथुरा-वृंदावन में वंशीवट, गया में गयावट जिसे बौधवट भी कहा जाता है और उज्जैन में पवित्र सिद्धवट.

सप्तम नायक : शेष भगवान
पौराणिक मान्यता के अनुसार शेष नाग के फन पर धरती टिकी हुई है.

अष्टमनायक : तीर्थराज प्रयाग
इस क्षेत्र के सबसे ज्यादा पूज्य देवता हैं. इन्हें माधवराज भी कहा जाता है. पुराणों में कहा गया है कि अयोध्या, मथुरा, मायापुरी, काशी, कांची, अवंतिका, और द्वारका- ये सप्त पुरियां तीर्थ राजप्रयाग की पत्नियां हैं. तीर्थराज ने इन्हें मुक्ति का अधिकार दिया है. इन सातों पुरियों में काशी श्रेष्ठ है. (kumbh.gov.in से साभार)

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