Lohri 2019 का पर्व 13 जनवरी को धूमधाम से मनाया जाएगा. ये पर्व पंजाब में खासतौर पर मनाया जाता है. इस दिन लोग घरों और चौराहों के बाहर लोहड़ी जलाते हैं. आग का घेरा बनाकर दुल्ला भट्टी की कहानी सुनाई जाती है. इस दौरान रेवड़ी, मूंगफली और लावा खाने की परंपरा हैं.Also Read - Happy Lohri Wishes 2022: लोहडी पर अपने दोस्‍तों और रिश्‍तेदारों को भेजें ये नये संदेश, लोग होंगे इम्‍प्रेस

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क्‍यों मनाते हैं लोहड़ी

सालों पहले इस त्‍योहार को फसल की बुआई और कटाई से जोड़कर मनाने की शुरुआत हुई. अलाव जलाकर उसके इर्दगिर्द लोग नाचते-गाते थे. एक-दूसरे को रेवडि़यां आदि बांटते थे. आज भी शादी या बच्‍चे के जन्‍म के बाद इस त्‍योहार को खास तरीके से मनाया जाता है.

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आग का महत्व

ऐसा कहा जात है कि राजा दक्ष की पुत्री सती की याद में आग को जलाया जाता है. पौराणिक कथा के मुताबिक, एक बार राजा दक्ष ने यज्ञ करवाया था. इसमें अपने दामाद शिव और पुत्री सती को आमंत्रित नहीं किया. इस बात से निराश होकर सती अपने पिता के पास जवाब लेने पहुंची. वहां पति शिव की निंदा वे बर्दाश्‍त ना कर सकीं और उन्‍होंने उसी यज्ञ में खुद को भस्म कर दिया. सती के मृत्यु का समाचार सुन भगवान शिव ने वीरभद्र को उत्पन्न कर उसके द्वारा यज्ञ का विध्वंस करा दिया.

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दुल्‍ला भट्टी की कहानी

लोहड़ी में दुल्‍ला भट्टी की कहानी सुनाई जाती है. इसकी कहानी ऐसी है. मुगलों के समय में दुल्ला भट्टी नामक युवक ने पंजाब की लड़कियों की रक्षा की थी. मुगलों के आतंक में बहुत सी लड़कियों को अमीर सौदागरों को बेचा जा रहा था. दुल्ला भट्टी ने इन लड़कियों को आजाद करवाकर उनकी शादी हिन्दू समाज में कराई. लोहड़ी के मौके पर लोग दुल्ला भट्टी को एक नायक के तौर पर याद करते हैं. वे उन्‍हें याद करते हुए गीत गाते हैं.

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