Lohri 2020 पर लोग आग जलाते हैं. इसके चारों ओर गीत गाते हैं. बिना आग जलाए लोहड़ी के पर्व का कोई अर्थ ही नहीं. Also Read - Kisan Andolan: दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने लोहड़ी पर नए कृषि कानूनों की प्रतियां जलाईं

हर साल लोहड़ी पर धूम-धड़ाका करते आपने भी लोगों को देखा होगा पर क्‍या आप जानते हैं कि आग जलाने की परंपरा के पीछे कारण क्‍या है. ये शुरू कैसे हुई. Also Read - Farmers Protest Latest Update: आज शाम 5.30 बजे कृषि कानूनों की कॉपी जलाकर लोहड़ी मनाएंगे किसान

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आग क्‍यों जलाते हैं
ऐसा कहा जाता है कि राजा दक्ष की पुत्री सती की याद में आग को जलाया जाता है. पौराणिक कथा के मुताबिक, एक बार राजा दक्ष ने यज्ञ करवाया था. इसमें अपने दामाद शिव और पुत्री सती को आमंत्रित नहीं किया. इस बात से निराश होकर सती अपने पिता के पास जवाब लेने पहुंची.

वहां पति शिव की निंदा वे बर्दाश्‍त ना कर सकीं और उन्‍होंने उसी यज्ञ में खुद को भस्म कर दिया. सती के मृत्यु का समाचार सुन भगवान शिव ने वीरभद्र को उत्पन्न कर उसके द्वारा यज्ञ का विध्वंस करा दिया.

Lohri 2020 Date: 13 या 14 जनवरी, किस दिन मनाई जाएगी लोहड़ी?

क्‍यों मनाते हैं लोहड़ी
सालों पहले इस त्‍योहार को फसल की बुआई और कटाई से जोड़कर मनाने की शुरुआत हुई. अलाव जलाकर उसके इर्दगिर्द लोग नाचते-गाते थे. एक-दूसरे को रेवडि़यां आदि बांटते थे. आज भी शादी या बच्‍चे के जन्‍म के बाद इस त्‍योहार को खास तरीके से मनाया जाता है.

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