Lohri 2026: सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन विचारा हो...दुल्ला भट्टी वाला हो! लोहड़ी पर क्यों गाई जाती है दुल्ला भट्टी की कहानी?

Lohri 2026: सिख व पंजाबी समुदाय के लिए लोहड़ी का पर्व बहुत ही खास होता है. इस दौरान लोग अग्नि के चारों ओर खड़े होकर लोकगीत गाते हैं और भांगड़ा करते हैं.

Written by: Renu Yadav
Published: January 12, 2026, 5:25 PM IST

Lohri 2026: मकर संक्रांति से एक दिन पहले लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है जो कि इस साल 13 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा. पंजाब व ​हरियाणा में इस पर्व बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. यह नई फसल की कटाई और ऋतु परिवर्तन का त्योहार है. लोहड़ी के मौके पर घरों में विशेष उत्सव आयोजित होता है और घर-परिवार के लोग इकट्ठा होकर अग्नि की परिक्रमा लगाते हैं. इस दौरान अग्नि में तिल, गजक, गुड़ और रेबड़ी डाले जाते हैं. साथ ही लोक गीत गाया जाता है ‘सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन विचारा हो ..दुल्ला भट्टी वाला हो, दुल्ले ती विआई..’ क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस लोकगीत में दुल्ला भट्टी कौन है और उनकी कहानी क्यों सुनाई जाती है? आइए जानते हैं इस गीत में छिपे लोहड़ी के महत्व के बारे में.

कौन है दुल्ला भट्टी?

लोहड़ी का पर्व बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है और इस दौरान परिवार, रिश्तेदार, पड़ोसी व दोस्त मिलकर इसके मनाते हैं. रात के समय ​खुले आसमान की नीचे अग्नि जलाई जाती है और रेवड़ी, मक्का, मूंगफली अग्नि में चढ़ाए जाते हैं. साथ ही ढोल-नगाड़े बजते हैं, भांगड़ा होता है और गिद्दा किया जाता है. ​अग्नि की परिक्रमा लगाते समय पारंपरिक लोकगीत ‘सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन विचारा हो ..दुल्ला भट्टी वाला हो, दुल्ले ती विआई..’ गाया जाता है. इसके गीत के जरिए दुल्ला भट्टी की कहानी सुनाई जाती है.

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दुल्ला भट्टी के बिना अधूरा है लोहड़ी का त्योहार

पंजाब में प्रचलित लोक​कथा के अनुसार मुगल काल में जब बादशाह अकबर का राज था, तब पंजाब में दुल्ला नाम का एक युवक रहा करता था. उस समय कुछ व्यापारी सामान के बदले लड़कियों का सौदा कर रहे थे और तभी दुल्ला को इस बारे में पता चला. तो वह उन लड़कियों को बचाने पहुंच गया और व्यापारियों चंगुल से लड़कियों को बचाकर उनकी शादी करवाई. दुल्ला के इस साहस को देखकर वहां के लोगों ने उसे भट्टी के नायक की उपाधि दी और उसका नाम दुल्ला भट्टी हो गया. कहते हैं कि लोहड़ी के पर्व पर गाया जाने वाला लोक​गीत उसी दुल्ला भट्टी की याद में गाया जाता है. इस लोकगीत के जरिए बच्चों को दुल्ला भट्टी के साहस की कहानी सुनाई जाती है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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