Lord Hanuman 108 Names: मंगलवार को करें हनुमान जी के 108 नाम का जाप...दूर होगी 100 कुलों की दरिद्रता, मिलेगी हर दोष से मुक्ति
Lord Hanuman 108 Names: हिंदू धर्म ग्रंथों में हनुमान जी को संकटमोचन भी कहा गया है क्योंकि वे अपने भक्तों के सभी संकटों का दूर करते हैं और उन्हें रोग, दोष व भय से भी मुक्ति दिलाते हैं.
Lord Hanuman
Lord Hanuman 108 Names in Hindi: रामभक्त हनुमान जी का नाम लेने से ही भक्तों के सभी कष्ट मिट जाते हैं और कहते हैं कि हनुमान जी का विधि-विधान से पूजन किया जाए तो जीवन में आ रही कई परेशानियां दूर होती हैं. बता दें कि हिंदू धर्म में सप्ताह के सातों दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित है और मंगलवार के दिन बजरंगबली का पूजन किया जाता है. हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए मंगलवार के दिन व्रत भी रखा जाता है और हनुमान चालीसा का भी पाठ किया जाता है. कहते हैं कि हनुमान चालीसा और बजरंगबाण बहुत ही शक्तिशाली हैं, इन्हें पढ़ने से आस-पास फैली नकारात्मकता दूर होती है. इसके अलावा हिंदू धर्म ग्रंथों में हनुमान जी के 108 नामों का भी जिक्र किया गया है जो कि बहुत ही पावरफुल हैं और यदि मंगलवार के दिन इन नामों का जाप किया जाए तो व्यक्ति को एक या दो नहीं, बल्कि 100 कुलों की दरिद्रता से मुक्ति मिल जाती है.
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कैसे करें हनुमान जी के नामों का जाप?
हनुमान जी के नाम में बहुत ही शक्ति है और इनका जाप करने से व्यक्ति को सभी दुखों से छुटकारा मिलता है. लेकिन ऐसा तभी संभव है जब सही तरीके से हनुमान जी के नाम का जाप किया जाए. बता दें कि सुबह उठकर हनुमान जी का पूजन करने के बाद इन नामों का जाप करना फलदायी होता है. इससे आस—पास फैली निगेटिविटी दूर होती है और मानसिक शांति मिलती है जिससे पूरा दिन अच्छा गुजरता है. वहीं शाम के समय हनुमान जी के समझ चमेली के तेल का दीपक जलाएं और फिर हनुमान चालीसा व उनके 108 नामों का जाप करें. ऐसा करना बहुत ही फलदायी माना गया है.
हनुमान जी के 108 नाम
- भीमसेन सहायकृते
- कपीश्वराय
- महाकायाय
- कपिसेनानायक
- कुमार ब्रह्मचारिणे
- महाबलपराक्रमी
- रामदूताय
- वानराय
- केसरी सुताय
- शोक निवारणाय
- अंजनागर्भसंभूताय
- विभीषणप्रियाय
- वज्रकायाय
- रामभक्ताय
- लंकापुरीविदाहक
- सुग्रीव सचिवाय
- पिंगलाक्षाय
- हरिमर्कटमर्कटाय
- रामकथालोलाय
- सीतान्वेणकर्त्ता
- वज्रनखाय
- रुद्रवीर्य
- वायु पुत्र
- रामभक्त
- वानरेश्वर
- ब्रह्मचारी
- आंजनेय
- महावीर
- हनुमत
- मारुतात्मज
- तत्वज्ञानप्रदाता
- सीता मुद्राप्रदाता
- अशोकवह्रिकक्षेत्रे
- सर्वमायाविभंजन
- सर्वबन्धविमोत्र
- रक्षाविध्वंसकारी
- परविद्यापरिहारी
- परमशौर्यविनाशय
- परमंत्र निराकर्त्रे
- परयंत्र प्रभेदकाय
- सर्वग्रह निवासिने
- सर्वदु:खहराय
- सर्वलोकचारिणे
- मनोजवय
- पारिजातमूलस्थाय
- सर्वमूत्ररूपवते
- सर्वतंत्ररूपिणे
- सर्वयंत्रात्मकाय
- सर्वरोगहराय
- प्रभवे
- सर्वविद्यासम्पत
- भविष्य चतुरानन
- रत्नकुण्डल पाहक
- चंचलद्वाल
- गंधर्वविद्यात्त्वज्ञ
- कारागृहविमोक्त्री
- सर्वबंधमोचकाय
- सागरोत्तारकाय
- प्रज्ञाय
- प्रतापवते
- बालार्कसदृशनाय
- दशग्रीवकुलान्तक
- लक्ष्मण प्राणदाता
- महाद्युतये
- चिरंजीवने
- दैत्यविघातक
- अक्षहन्त्रे
- कालनाभाय
- कांचनाभाय
- पंचवक्त्राय
- महातपसी
- लंकिनीभंजन
- श्रीमते
- सिंहिकाप्राणहर्ता
- लोकपूज्याय
- धीराय
- शूराय
- दैत्यकुलान्तक
- सुरारर्चित
- महातेजस
- रामचूड़ामणिप्रदाय
- कामरूपिणे
- मैनाकपूजिताय
- मार्तण्डमण्डलाय
- विनितेन्द्रिय
- रामसुग्रीव सन्धात्रे
- महारावण मर्दनाय
- स्फटिकाभाय
- वागधीक्षाय
- नवव्याकृतपंडित
- चतुर्बाहवे
- दीनबन्धवे
- महात्मने
- भक्तवत्सलाय
- अपराजित
- शुचये
- वाग्मिने
- दृढ़व्रताय
- कालनेमि प्रमथनाय
- दान्ताय
- शान्ताय
- प्रसनात्मने
- शतकण्ठमदापहते
- योगिने
- अनघ
- अकाय
- तत्त्वगम्य
- लंकारि
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
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