Lord Shiv Unique Temple The Broom Is Climbed In This Temple Of Lord Shiva Know The Reason
भगवान शिव के इस मंदिर में दूध के साथ चढ़ाई जाती है झाड़ू! वजह जानकर चौंक जाएंगे आप
Lord Shiv Temple: भगवान शिव को सावन का महीना बहुत प्रिय है. इस माह उन्हें प्रसन्न करने के लिए दूध, गंगाजल, धतूरा और बेलपत्र अर्पित करना शुभ माना जाता है. लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि एक मंदिर शिवजी को झाड़ू चढ़ाई जाती है.
Lord Shiv Temple: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि आप भगवान शिव को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो सावन के महीने में विधि-विधान से उनका जलाभिषेक व पूूजन करें. क्योंकि सावन का महीना देवो के देव महादेव को बेहद प्रिय है और इस माह यदि उनसे कुछ मांगा जाए तो वह अपने भक्तों को निराश नहीं करते. कहते हैं कि सावन के महीने में भोलेनाथ को दूध, गंगाजल, भांग, धतूरा और बेलपत्र जरूर अर्पित करने चाहिए. ये सभी शिव भोलेनाथ को प्रिय हैं और इन्हें अर्पित करने से वह प्रसन्न होते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में एक ऐसा मंदिर पर स्थित है जहां भगवान शिव को दूध के साथ-साथ झाड़ू भी चढ़ाई जाती है?
शिव जी का अनोखा मंदिर
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए पूजा में उनकी प्रिय चीजें जैसे कि दूध, गंगाजल, शहद, भांग, धतूरा, बेलपत्र आदि अर्पित किए जाते हैं. लेकिन देश में एक मंदिर ऐसा भी है जहां भोलेनाथ को झाड़ू भी चढ़ाई जाती है. यह मंदिर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में स्थित है जिसे शिव पातालेश्वर नाम से जाना जाता है.
पातालेश्वर मंदिर को लेकर यहां के लोगों के बीच काफी श्रद्धा और विश्वास है. यहां के स्थानीय लोगों का मानना है कि इस मंदिर में पूजा करने और भगवान शिव को झाड़ू चढ़ाने से व्यक्ति को त्वचा संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है. मुरादाबाद में यह मंदिर बेहद ही लोकप्रिय है. यह मंदिर करीब 150 साल पुराना है और यहां तभी से झाड़ू चढ़ाने की परंपरा है. मान्यता है कि अगर कोई व्यक्ति त्वची संबंधी रोगों से परेशान है तो उसे पातालेश्वर मंदिर में जाकर झाड़ू जरूर अर्पित करनी चाहिए.
पातालेश्वर मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार शिव मुरादाबाद में एक भिखारीदास नाम का व्यापारी रहता था, जो बहुत धनवान था. लेकिन उसे तवचा सम्बन्धी एक बड़ा रोग था. वह इस रोग का इलाज करवाने जा रहा था कि अचानक उसे प्यास लगी. वह भगवान के इस मंदिर में पानी पीने आया और तभी वजह झाड़ू मार रहे महंत से टकरा गया. जिसके बाद बिना इलाज ही उसका रोग दूर हो गया. इससे खुश होकर सेठ ने महंत को अशरफियां देनी चाही. लेकिन महंत ने इसे लेने से इनकार कर दिया. इसके बदले उसने सेठ से यहां मंदिर बनवाने की प्रार्थना की. इसके बाद इस मंदिर के लिए ये बात कही जाने लगी कि त्वचा संबंधी रोग होने पर यहां झाड़ू चढ़ानी चाहिए.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
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