भगवान विष्‍णु के पास सुदर्शन चक्र है. तमाम असुरों का वध उन्‍होंने इसी से किया. वैष्‍णवों के लिए इस चक्र का विशेष स्‍थान है.

पर आप जानते हैं कि भगवान विष्‍णु के पास ये चक्र कैसे आया? इसके पीछे क्‍या पौराणिक कथा है?

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चक्र की पौराणिक कथा
सबसे पहले तो ये जान लीजिए कि इस चक्र को संसार में सबसे शक्तिशाली चक्र कहा जाता है. इसे भगवान शिव ने ही भगवान विष्णु को दिया था.

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु, भगवान शिव की पूजा करने काशी गए. वहां मणिकार्णिका घाट पर स्नान कर विष्णु ने एक हजार स्वर्ण कमल फूलों से भगवान शिव की पूजा का संकल्प लिया.

भगवान शिव ने भी भगवान विष्णु की भक्ति की परीक्षा लेने के लिए एक कमल का फूल कम कर दिया. भगवान विष्णु ने जब एक फूल कम पाया तो अपनी एक आंख को शिव को चढ़ाने का संकल्प लिया. चूंकि भगवान विष्णु की आंखों को कमल के समान सुंदर कहा गया है, इसलिए उन्‍होंने ये संकल्‍प लिया.

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विष्णु जी जैसे ही अपनी आंख भगवान को चढ़ाने के लिए तत्‍पर हुए, वैसे ही वहां शिव प्रकट हुए. वे बोले कि इस पूरे संसार में तुम्हारे समान मेरा कोई दूसरा भक्त नहीं. उस दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी थी.

भगवान शिव ने विष्णु जी से प्रसन्न होकर सुदर्शन चक्र उन्‍हें प्रदान किया. भगवान शिव ने कहा कि तीनों लोकों में इसकी बराबरी करने वाला कोई अस्त्र नहीं होगा. यह अकेला चक्र राक्षसों का विनाश करने में सक्षम होगा.

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