Lunar Eclipse 2019: नए साल का पहला चन्‍द्रग्रहण कल यानी सोमवार 21 जनवरी को लगने वाला है. हालांकि यह चंद्रग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, लेकिन धार्मिक दृष्टि से यह खगोलीय घटना यहां बहुत महत्वपूर्ण है. वैज्ञानिकों द्वारा सुपर ब्लड मून कहा जा रहा यह चंद्रग्रहण केवल अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी-दक्षिणी अमेरिका और मध्य प्रशांत के देशों में दिखाई देगा. Also Read - Chandra Grahan 2020: लाख गुणों से भरपूर है तुलसी का पौधा, जानें ग्रहण में इसके चमत्कारिक प्रभाव

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क्‍या है सही समय
भारतीय समयानुसार ये चंद्रग्रहण सुबह 10.11 बजे से शुरू होगा और तकरीबन 1 घंटा यानि 11.12 बजे तक रहेगा. वही ग्रहण से पहले सूतक काल 12 घंटे पहले ही शुरू हो जाता है. इस लिहाज़ से सूतक 20 जनवरी की रात 9 बजे से ही शुरू हो जाएगा. वैसे बता दें कि चूंकि यह चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, इसलिए यहां पर इसका धार्मिक महत्व और सूतक मान्य नहीं होगा. चंद्र ग्रहण पुष्य नक्षत्र और कर्क राशि में लगेगा, इसलिए इस राशि और नक्षत्र से संबंधित लोग इस चंद्र ग्रहण से प्रभावित होंगे. Also Read - 2020 में दुनिया को दिखाई देंगे ग्रहण के 6 नजारे, भारत में इतने आएंगे नजर

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क्‍यों होता है चन्‍द्रग्रहण
चंद्रग्रहण उस खगोलीय स्थिति को कहते है जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया में आ जाता है. ऐसा तभी हो सकता है जब सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा इस क्रम में लगभग एक सीधी रेखा में अवस्थित हों. इस ज्यामितीय प्रतिबंध के कारण चंद्रग्रहण केवल पूर्णिमा को घटित हो सकता है. चंद्रग्रहण का प्रकार एवं अवधि चंद्र आसंधियों के सापेक्ष चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करते हैं. चांद के इस रूप को ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है. चंद्र ग्रहण शुरू होने के बाद ये पहले काले और फिर धीरे-धीरे सुर्ख लाल रंग में तब्दील होता है. किसी सूर्यग्रहण के विपरीत, जो कि पृथ्वी के एक अपेक्षाकृत छोटे भाग से ही दिख पाता है, चंद्रग्रहण को पृथ्वी के रात्रि पक्ष के किसी भी भाग से देखा जा सकता है. जहां चंद्रमा की छाया की लघुता के कारण सूर्यग्रहण किसी भी स्थान से केवल कुछ मिनटों तक ही दिखता है, वहीं चंद्रग्रहण की अवधि कुछ घंटों की होती है. इसके अतिरिक्त चंद्रग्रहण को, सूर्यग्रहण के विपरीत, आँखों के लिए बिना किसी विशेष सुरक्षा के देखा जा सकता है, क्योंकि चंद्रग्रहण की उज्ज्वलता पूर्ण चंद्र से भी कम होती है.

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