मासिक शिवरात्रि, प्रदोष व्रत अगस्‍त 2019: इस बार अगस्‍त माह में मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत (कृष्‍ण) एक ही दिन हैं. पांचांग के अनुसार 28 अगस्‍त, बुधवार को इन दोनों व्रतों को किया जाएगा. जो लोग शिव पूजन करते हैं वे एक ही दिन व्रत रखकर दो व्रत का फल प्राप्‍त कर सकते हैं.

संपूर्ण पांचांग व शुभ मुहूर्त

बुधवार, २८ अगस्त २०१९
सूर्योदय : ०६:२६
सूर्यास्त : १८:५३
चन्द्रोदय : २८:५५
चन्द्रास्त : १७:२३
शक सम्वत : १९४१ विकारी
विक्रम सम्वत : २०७६ परिधावी
गुजराती सम्वत : २०७५
अमांत महीना : श्रावण
पूर्णिमांत महीना : भाद्रपद
पक्ष : कृष्ण पक्ष
तिथि : त्रयोदशी – २३:२८ तक
नक्षत्र : पुष्य – २२:५६ तक
योग : वरीयान् – २६:२८ तक
प्रथम करण : गर – १३:०६ तक
द्वितीय करण : वणिज – २३:२८ तक
सूर्य राशि : सिंह
चन्द्र राशि : कर्क
राहुकाल : १२:४० – १४:१३
गुलिक काल : ११:०६ – १२:४०
यमगण्ड : ०७:५९ – ०९:३३
अभिजितमुहूर्त : कोई नहीं
दुर्मुहूर्त : १२:१५ – १३:०५
अमृत काल : १७:०९ – १८:३५
वर्ज्य : ०८:२८ – ०९:५५

व्रत विधि
सूर्य उदय से पहले उठें और स्नान कर लें. इसके बाद पूजा घर में भगवान शंकर के सामने आसन लगाकर बैठे और व्रत का संकल्प लें. इस व्रत में भोजन नहींं करते. इसलिए शाम तक आप कुछ नहीं खा सकते.

शाम को सूर्यास्त से एक घंटे पहले स्नान करें और श्वेत और साफ वस्त्र पहनें. इसके बाद पूजा घर की साफ-सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव कर पूरे घर को शुद्ध करें.

अगर पूजा घर मिट्टी का कमरा है तो उसे पहले गाय के गोबर से लीप लें. मंडप तैयार करें और उसमें पांच रंगों से रंगोली बनाएं. प्रदोष व्रत कि आराधना करने के लिए कुशा के आसन का प्रयोग किया जाता है. इस प्रकार पूजन की तैयारियां करके उतर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे और भगवान शंकर का पूजन करना चाहिए.

पूजन में भगवान शिव के मंत्र ‘ऊँ नम: शिवाय’ का जाप करते हुए शिव को जल चढ़ाना चाहिए.