Magh Purnima 2020: माघ पूर्णिमा या माघी पूर्णिमा इस साल 9 फरवरी को है. इस पूर्णिमा को विशेष पुण्‍यदायक माना गया है. हिंदू धर्म में कहा गया है कि माघी पूर्णिमा पर स्नान से विशेष प्रकार का पुण्य मिलता है.

माघ पूर्णिमा पर व्रत रखा जाता है. इस दिन भगवान विष्‍णु का पूजन भी किया जाता है. कहा गया है कि माघ पूर्णिमा पर भगवान विष्‍णु धरती पर रहते हैं.

माघ पूर्णिमा व्रत कथा – Magh Purnima Vrat Katha

कांतिका नगर में धनेश्वर नाम का ब्राह्मण निवास करता था जो दान पर अपना जीवन निर्वाह करता था. ब्राह्मण और उसकी पत्नी के कोई संतान नही थी. एक दिन उसकी पत्नी नगर में भिक्षा मांगने गई. लेकिन सबने उसे भिक्षा देने से इनकार कर दिया.

कई लोगों ने बांझ कहकर उसका अपमान किया. तब एक व्यक्ति ने उसे 16 दिन तक मां काली की पूजा करने को कहा. ब्राह्मण दंपत्ति ने ऐसा ही किया और 16 दिन बाद मां काली स्वयं प्रकट हुईं.

मां काली ने ब्रह्मण की पत्नी को गर्भवती होने का वरदान दिया और कहा कि अपने सामर्थ्य के अनुसार प्रत्येक पूर्णिमा को तुम दीपक जलाओ. हर पूर्णिमा को तुम 1 दीपक बढ़ा देना. इस तरह कर्क पूर्णिमा के दिन तक कम से कम 22 दीपक जलाना.

ब्राह्मण ने पत्नी को पूजा के लिए पेड़ से आम का कच्चा फल तोड़कर दिया. उसकी पत्नी ने पूजा की और गर्भवती हुई. प्रत्येक पूर्णिमा को वह मां काली के कहे अनुसार दीपक जलाती रही. मां काली की कृपा से उनके घर एक पुत्र ने जन्म लिया जिसका नाम देवदास रखा गया.

बड़ा होने पर उसे अपने मामा के साथ पढ़ने के लिए काशी भेजा गया. काशी में उन दोनों के साथ एक दुर्घटना घटी जिसके कारण धोखे से देवदास का विवाह हो गया. देवदास ने कहा कि वह अल्पायु है लेकिन उसके बावजूद भी जबरन उसका विवाह करवा दिया गया.

कुछ समय बाद काल उसके प्राण लेने आया लेकिन ब्राह्मण दंपत्ति ने पूर्णिमा का व्रत रखा था इसलिए काल उसका कुछ बिगाड़ नहीं पाया. इस कथा के अनुसार सच्चे मन से पूर्णिमा के दिन व्रत करने से संकट से मुक्ति मिलती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

क्या करें इस दिन

शास्‍त्रों में कहा गया है कि माघी पूर्णिमा पर भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं. इस दिन सुबह नित्य कर्म से निवृत्त होकर गंगाजल में स्नान करना चाहिए. फिर गंगाजल का आचमन करना चाहिए. इस दिन पितर देवता रूप में गंगा स्नान के लिए आते हैं इसलिए पितरों का ध्यान करते हुए भी दान इत्यादि करना चाहिए. इस दिन पितरों का श्राद्ध किया जाये तो उन्हें मोक्ष मिलता है. इस दिन तिल, गुड़, घी, फल, अन्न, कंबल का दान उत्तम माना गया है.

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