Paush Purnima 2020 का काफी महत्‍व है. ऐसा माना जाता है कि पौष पूर्णिमा पर स्नान-दान से मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसलिए इसी दिन से माघ स्‍नान का आरंभ भी हो जाता है.

इस साल पौष पूर्णिमा 10 जनवरी, शुक्रवार को है. माघ स्‍नान 10 जनवरी से आरंभ हो जाएगा और 9 फरवरी तक चलेगा.

माघ स्‍नान के दौरान पवित्र नदियों में स्‍नान करने की पंरपरा सालों से चली आ रही है. इस दौरान स्‍नान, व्रत की महत्‍वता पद्म पुराण में भी बताई गई है.

माघ स्‍नान कथा
पद्म पुराण में ये कथा बताई गई है.
प्राचीन काल में नर्मदा के तट पर सुब्रत नाम के एक बहुत विद्वान ब्राह्मण रहते थे. विद्वान होते हुए भी उन्होंनें धर्म-कर्म का कोई काम नहीं किया, बस धन कमाने में लगे रहे. एक दिन उनकी जीवन भर कमाई पूंजी को किसी ने चुरा लिया. तब जाकर उन्हें धन की नश्वरता का ज्ञान हुआ और पश्चाताप करने लगे.
फिर उन्हें एक आधा-अधूरा मंत्र याद आया जिसका सार था कि माघ स्नान करके जीवन का उद्धार किया जा सकता है. उन्होनें लगातार 9 दिनों तक नर्मदा में स्नान किया और दसवें दिन उनकी मृत्यु हो गई. कहा जाता है मृत्यु पर्यन्त उन्हें स्वर्ग तथा मोक्ष की प्राप्ति हुई.

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दान-उपवास का महत्व
– माघ स्‍नान के दौरान जो ब्राह्मणों को तिल दान करते हैं, उन्हें नरक के दर्शन नहीं करने पड़ते.
– जो एक समय भोजन करते हैं वे अगले जन्म में धनवान कुल में पैदा होते हैं.
– इस माह की द्वादशी को उपवास करने से राजसूय यज्ञ समान पुण्य की प्राप्ति होती है.
– माघ स्नान एवं अनुष्ठान से ही प्रतिष्ठान पुरी के नरेश पुरुरवा को अपनी कुरुपता से मुक्ति मिली थी. भृगु ऋषि के सुझाव से व्याघ्रमुख वाले विद्याधर व गौतम ऋषि के श्राप से इन्द्र को मुक्ति भी माघ स्नान के सत्व द्वारा ही मिली थी.
– पद्म पुराण के अनुसार माघ स्नान से मनुष्य के शरीर में स्थित उपाताप नष्ट हो जाते हैं.

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