नई दिल्‍ली: माघ शुक्‍ल चतुर्थी पर गणेश जयंती व तिल कुंड चतुर्थी व माघ विनायक चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है. मान्‍यता है कि माघ शुक्‍ल चतुर्थी को सर्वप्रथम गणेश तरंगें धरती पर आईं थीं. अत: इस दिन गणेश जंयती मनाई जाती है. दक्षिण भारतीय मान्‍यतानुसार इस दिन श्रीगणेश का जन्‍म हुआ था. अत: इस दिन को गणेश जी के जन्‍मदिन के रूप में मनाया जाता है.

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तिल कुंड चतुर्थी पर गणपति का प्रभाव एक हजार गुना अधिक कार्यरत होता है. गणेश के स्‍पंदन व चतुर्थी पर धरती का स्‍पंदन एक समान होने के कारण, धरती व गणपति एक-दूसरे के लिए अनुकूल होते हैं अर्थात इस दिन श्रीगणेश का स्‍पंदन धरती पर अधिक मात्रा में आता है. इस तिथि पर की गई गणेश उपासना को सर्वाधिक लाभ देती है. अग्निपुराण में भागे व मोक्ष प्राप्ति के लिए तिलकुंड चतुर्थी के व्रत का विधान बताया गया है. इस चतुर्थी पर चंद्रदर्शन निषेध है और देखने पर मानसिक विकार उत्‍पन्‍न होते हैं. गणेश जयंती पूजा में लाल वस्‍त्र, लाल फूल व लाल चंदन का प्रयोग किया जाता है. गणेश जयंती के व्रत, पूजा व उपाय से संकटों का नाश होता है. मनोविकार दूर होते हैं व समस्‍याओं का समाधान होता है.

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शुभ मुहूर्त और तिथि
चतुर्थी तिथि आरंभ- 8 फरवरी 2019, सुबह 10.17 बजे से,
चतुर्थी तिथि समाप्त- 9 फरवरी 2019, सुबह 12.25 बजे तक.

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श्री गणेश पूजन विधि
– पूजन से पहले नित्य कर्म से निवृत्त होकर शुद्ध आसान में बैठकर सभी पूजन सामग्री को एकत्रित कर पुष्‍प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक आदि एकत्रित कर क्रमश: पूजा करें.
– भगवान श्रीगणेश को तुलसी दल व तुलसी पत्र नहीं चढ़ाना चाहिए. उन्‍हें शुद्ध स्‍थान से चुनी हुई दुर्वा को धोकर ही चढ़ाना चाहिए.
– श्रीगणेश को मोदक अधिक प्रिय होते हैं, इसलिए उन्‍हें देशी घी में बने मोदक का प्रसाद भी चढ़ाना चाहिए.
– श्रीगणेश सहित प्रभु शिव व गौरी, नंदी, कार्तिकेय सहित शिव परिवार की पूजा षोडषोपचार विधि से करना चाहिए.
– किसी भी पूजा के बाद सभी आवाहित देवताओं को शास्‍त्रीय विधि से पूजा-अर्चना करने के बाद उनका विसर्जन किया जाता है. किन्‍तु श्रीलक्ष्‍मी और श्रीगणेश का विसर्जनन नहीं किया जाता है. उन्‍हें अपने निवास स्‍थान में श्री लक्ष्‍मी जी सहित रहने के लिए निमंत्रित करें.

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