महाशिवरात्रि (Maha Shivratri 2019) का पर्व पूरे देश में हर्षोल्‍लास से मनाया जा रहा है. पर इस दिन शाम से देर रात तक पूजा का विशेष महत्‍व है.

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ये पूजन अगर चार विषेश प्रहर में किया जाए तो इसका महत्‍व और बढ़ जाता है. इन प्रहरों के बारे में जानने से पहले ये जानें कि आखिर शिवरात्रि पर रात्रि पूजा का महत्‍व क्‍या है?

रात्रि पूजा का महत्‍व
पुरातन काल से शिवरात्रि पर रात को जागने की बात कही जाती है. कुछ लोग पूरी रात पूजा करते हैं तो कुछ शिव-पार्वती विवाह के तौर पर जागरण करते हैं. इसलिए गुरुजन कहते हैं कि इस रात को ना तो सोना चाहिए और ना ही अपने दोस्‍तों-परिजनों को सोने देना चाहिए.

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चार प्रहर पूजा
पहले प्रहर की पूजा- शाम 07:42 से 09:40 बजे तक

दूसरे प्रहर की पूजा- रात 10:00 से 12:50 बजे तक

तीसरे प्रहर की पूजा- रात 1:20 से 03:50 बजे तक

चौथे प्रहर की पूजा- रात 04:10 से सुबह 05:30 बजे तक

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चार प्रहर पूजा का महत्‍व
महाशिवरात्रि की रात चारों प्रहरों में भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और हर मनोकामना पूरी करते हैं.

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