Maha Shivratri 2019: महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यह मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित, महाकालेश्वर भगवान का प्रमुख मंदिर है. पुराणों, महाभारत और कालिदास जैसे महाकवियों की रचनाओं में इस मंदिर का मनोहर वर्णन मिलता है. स्वयंभू, भव्य और दक्षिणमुखी होने के कारण महाकालेश्वर महादेव की अत्यन्त पुण्यदायी महत्ता है. इसके दर्शन मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है, ऐसी मान्यता है. महाकवि कालिदास ने मेघदूत में उज्जयिनी की चर्चा करते हुए इस मंदिर की प्रशंसा की है.

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1235 ई. में इल्तुत्मिश के द्वारा इस प्राचीन मंदिर का विध्वंस किए जाने के बाद से यहां जो भी शासक रहे, उन्होंने इस मंदिर के जीर्णोद्धार और सौन्दर्यीकरण की ओर विशेष ध्यान दिया, इसीलिए मंदिर अपने वर्तमान स्वरूप को प्राप्त कर सका है. प्रतिवर्ष और सिंहस्थ के पूर्व इस मंदिर को सुसज्जित किया जाता है.

जानें क्‍यों होती है भस्‍म आरती
महाकालेश्‍वर मंदिर में हर रोज सुबह भस्‍म आरती विशेष रूप से की जाती है. यह प्राचीन परंपरा है. आइये जानते हैं शिवपुराण के अनुसार शिवलिंग पर भस्‍म क्‍यों अर्पित की जाती है. भगवान शिव अद्भूत व अविनाशी हैं. भगवान शिव जितने सरल हैं, उतने ही रहस्‍यमयी भी हैं. भोलेनाथ का रहन-सहन, आवास, गण आदि सभी देवताओं से एकदम अलग है.

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शास्‍त्रों में एक ओर जहां सभी देवी-देवताओं को सुंदर वस्‍त्र और आभूषण से सुसज्जित बताया गया है, वहीं दूसरी ओर भगवान शिव का रूप निराला ही बताया गया है. शिवजी सदैव हिरण की खाल धारण किए रहते हैं और शरीर पर भस्‍म लगाए रहते हैं. शिवजी का प्रमुख वस्‍त्र भस्‍म यानी राख है, क्‍योंकि उनका पूरा शरीर भस्‍म से ढका रहता है. शिवपुराण के अनुसार, भस्‍म संसार का सार है, एक दिन संपूर्ण संसार इसी राख के रूप में परिवर्तित हो जानी है.

शिवजी सदैव धारण किए रहते हैं भस्‍म
ऐसा माना जाता है कि चारों युग (त्रेता युग, सतयुग, द्वापर युग और कलयुग) के बाद इस संसार का विनाश हो जाता है और फिर संसार की रचना ब्रह्मा जी द्वारा की जाती है. यह क्रिया अनवरत चलती रहती है. इस संसार के सार भस्‍म यानी राख को शिवजी सदैव धारण किए रहते हैं. इसका यही अर्थ है कि एक दिन यह संपूर्ण संसार शिवजी में विलीन हो जानी है.

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कैसे तैयार होता है भस्‍म
शिवपुराण के अनुसार, भस्‍म तैयार करने के लिए कपिला गाय के गोबर से बने कंडे, शमी पीपल, पलाश, बड, अमलतास और बैर के पेड़ की लकडि़यों को एक साथ जलाया जाता है. इस दौरान उचित मंत्रोच्‍चारण किए जाते हैं. इन चीजों को जलाने पर जो भस्‍म प्राप्‍त होती है, उसे कपड़े से छान लिया जाता है कि इस प्रकार तैयारी की गई भस्‍म को यदि कोई इंसान भी धारण करता है तो वह सभी सुख-सुविधाएं प्राप्‍त करता है. शिवपुराण के अनुसार ऐसी भस्‍म धारण करने से व्‍यक्ति का आकर्षण बढ़ता है, समाज में मान-सम्‍मान प्राप्‍त होता है. अत: शिवजी को अर्पित की गई भस्‍म का तिलक लगाना चाहिए.

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