नई दिल्‍ली: अयोध्या से सटे यूपी के गोंडा जिले में त्रेता युग के प्रमाण तो आसानी से जगह-जगह दिखाई पड़ते हैं लेकिन द्वापर युग के प्रमाण मिलना किसी अजूबे से कम नहीं. गोंडा जिले के खरगूपुर कस्‍बे में एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग भीम द्वारा स्थापित किया गया था. यहां पर साल में कई बड़े मेले भी लगते हैं, जो कि महाशिवरात्रि, सावन सोमवार, मास शिवरात्रि, गंगा दशहरा, कजली तीज आदि त्‍योहारों पर लगता है. जहां लाखों की संख्‍या में कांवड़िये जल चढ़ाकर भोले नाथ को प्रसन्न करते हैं इस शिवलिंग पर नक्काशी महाभारत कालीन हैं. Also Read - Farmers 5th Round Talk With Govt Live Update: किसान नेताओं और सरकार के बीच 5वें राउंड की मीटिंग शुरू

Also Read - UP: MLC Election ड्यूटी में तैनात IAS अधिकारी का हार्ट अटैक से निधन, CM योगी ने शोक जताया

Also Read - Delhi Traffic Latest Alert: आज भी दिल्‍ली के कई बॉर्डर बंद, असुविधा से बचने इन रूट्स का करें उपयोग

क्‍या है महत्‍व

महाभारत के अनुसार वनवास के समय भीम ने बकासुर का वध किया था, जिसमें भीम को ब्रह्म हत्या का दोष लगा था. पाप मार्जन करने के लिए भीम ने शिवलिंग की स्थापना की थी, कहा जाता हैं की ये सात खंडों का शिवलिंग हैं जो 15 फुट ऊपर दिखता हैं और 64 फिट ज़मीन के नीचे ये सिंगल पीस का कसौटी का बना एशिया का सबसे बड़ा शिव लिंग हैं.

Maha Shivratri 2019: जानें त्रिलोचन का तीन से कनेक्‍शन, इस रहस्‍य से अंजान होंगे आप

ऐसे पड़ा मंदिर का नाम

इस मंदिर के बारे में जानकारों का कहना है कि मुगल सम्राट के कार्यकाल में उनके किसी सेनापति ने यहां पूजा अर्चना की थी और मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था. भीम द्वारा स्थापित यह शिवलिंग धीरे-धीरे जमीन में समा गया. कालांतर में खरगूपुर के राजा मानसिंह की अनुमति से यहां के निवासी पृथ्वीनाथ सिंह ने मकान निर्माण कराने के लिए खोदाई शुरू करा दी.

Maha Shivratri 2019: काशी विश्वनाथ, जहां बसते हैं महादेव, बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है यह मंदिर

उसी रात पृथ्वी सिंह को स्वप्न में पता चला कि नीचे सात खंडों का शिवलिंग दबा है. उन्हें एक खंड तक शिवलिंग खोजने का निर्देश हुआ. इसके बाद शिवलिंग खोदवाकर पूजा-अर्चना शुरू करा दी. इसके बाद उनके नाम पर ही पृथ्वीनाथ मंदिर मशहूर हो गया.

Maha Shivratri 2019: महाकालेश्‍वर मंदिर में हर रोज होती है भस्‍म आरती, जानिए इसका रहस्‍य

कैसे पहुंचे

हवाई जहाज से

गोंडा से निकटतम हवाई अड्डा लखनऊ है. लखनऊ हवाईअड्डा गोंडा से करीब 133 किलोमीटर दूर है. हवाई अड्डा भारत के अन्य शहरों जैसे कि नई दिल्ली, मुंबई, आगरा, चेन्नई और बेंगलुरु से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है, दोनों निजी और सार्वजनिक वाहक द्वारा संचालित उड़ानों के माध्यम से जुड़ा हुआ है.

Mahashivratri 2019: कब है महाशिवरात्रि, जानिए शुभ मुहूर्त, व्रत का महत्व और पूजन विधि

रेल/ट्रेन द्वारा

निकटतम रेलवे लखनऊ है जो गोंडा से 117 किलोमीटर दूर है. गोंडा स्टेशन उत्तर प्रदेश और भारत जैसे अन्य शहरों जैसे नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, आगरा, लखनऊ, बैंगलोर और अहमदाबाद आदि से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है.

संगम से साधुओं का काशी कूच, महाशिवरात्रि स्‍नान को दिया नारा- ‘अब चलो महादेव के धाम’

रास्ते से

गोंडा अच्छी तरह से सड़क के किनारे उत्तर प्रदेश के बाकी हिस्सों से जुड़ा हुआ है. इसके अलावा गोंडा लखनऊ, बरेली, कानपुर, इलाहाबाद, आगरा और मथुरा जैसे शहरों से जुड़ा हुआ है. उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के साथ-साथ निजी साधनो से भी गोंडा आया जा सकता है.

धर्म की और खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.