Maha Shivratri 2020: महाशिवरात्रि पर शिव भक्‍त बम-बम भोले के जयकारेे लगाते हैं. मंदिरों में अपार भीड़ होती है. लोग शिवलिंग का अभिषेक करते हैं.

पर क्‍या आप जानते हैं कि शिवरात्रि पर शिव मूर्ति की अपेक्षा शिवलिंग की पूजा का क्‍यों की जाती है?

दरअसल, लिंग को भगवान शिव के रूप में देखा जाता है. इसी कारण इसकी पूजा-अर्चना की जाती है. महाशिवरात्रि पर शिवलिंग अभिषेक किया जाता है.

शिवलिंग की उत्‍पत्ति

शिवलिंग भगवान शिव का प्रतीक है. शिव का अर्थ है– कल्याणकारी और लिंग का अर्थ है सृजन. सर्जनहार के रूप में लिंग की पूजा होती है.

संस्कृत में लिंग का अर्थ है प्रतीक. भगवान शिव अनंत काल के प्रतीक हैं. मान्यताओं के अनुसार, लिंग एक विशाल लौकिक अंडाशय है, जिसका अर्थ है ब्रह्माण्ड. इसे ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है.

क्या कहता है लिंग महापुराण

लिंग महापुराण के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा और विष्णु के बीच अपनी-अपनी श्रेष्ठता साबित करने को लेकर विवाद हुआ. दोनों अपने आपको श्रेष्ठ बताने के लिए एक-दूसरे का अपमान करने लगे. लेकिन जब दोनों का विवाद चरम सीमा तक पहुंच गया, तब अग्नि की ज्वालाओं से लिपटा एक विशाल लिंग दोनों देवों के बीच आकर स्थापित हो गया.

दोनों देव इस लिंग के रहस्य का पता लगाने में जुट गए. भगवान ब्रह्मा उस लिंग के ऊपर की तरफ बढ़े और भगवान विष्णु नीचे की ओर जाने लगे. हजारों सालों तक जब दोनों देव इस लिंग का पता लगा पाने में नाकाम रहे, तो उन्‍होंने अपनी हार कुबूल की. वे उसी जगह पहुंचे जहां उन्‍होंने उस लिंग को देखा था.

लिंग के पास पहुंचते ही दोनों देवों को लिंग से ओम स्वर की ध्वनि सुनाई देने लगी. दोनों ने लिंग की अराधना की. इससे भगवान शिव प्रसन्न हुए. फिर वे उस विशाल लिंग से प्रकट हुए. उन्होंने दोनों देवों को सद्बुद्धि का वरदान दिया. तब से लिंग रूप में भगवान शिव की अराधना की जाने लगी.

महाशिवरात्रि 2020

इस बार महाशिवरात्रि 21 फरवरी, शुक्रवार को है. यूं तो हिंदू धर्म में हर माह शिवरात्रि आती है पर फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को पड़ने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि के रूप में पूजा जाता है. इसी दिन शिव-पार्वती (Shiv Parvati Marriage) का विवाह हुआ था. इसलिए दोनों का साथ में पूजन किया जाता है.

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