भगवान शिव की जटाओं से क्यों बहती है गंगा? जानें इसके पीछे छिपा रहस्य

Maha Shivratri 2025: शिव पुराण में भगवान शिव की महिमा और उनके स्वरूप का वर्णन किया गया है. शिव जी का अनोखा स्वरूप उन्हें सभी देवी-देवताओं से भिन्न बनाता है.

Published date india.com Updated: February 26, 2025 4:24 PM IST
Maha Shivratri 2025: भगवान शिव की जटाओं से क्यों बहती है गंगा? जानें इसके पीछे छिपा रहस्य

Maha Shivratri 2025: हिंदू धर्म में 33 करोड़ देवी-देवताओं का जिक्र किया गया है और सभी देवी-देवता तस्वीरों में अच्छे-अच्छे वस्त्रों व आभूषणों से सजे हुए नजर आते हैं. लेकिन भगवान शिव एक ऐसे देवता हैं जिनका स्वरूप सबसे अलग और अनोखा है. भोलेनाथ के स्वरूप का वर्णन करते ही मन में एक अलग सी प्रतिमा बन जाती है. भोलेनाथ अपने गले में आभूषण नहीं बल्कि सांपों की माला पहनते हैं. उनके सिर पर मुकुट नहीं, बल्कि चंद्र देवता विराजमान हैं और उनकी जटाओं से मां गंगा बहती हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर मां गंगा भगवान शिव की जटाओं से क्यों बहती हैं और इसके पीछे क्या वजह है? आइए जानते हैं इसके पीछे छिपे रहस्य के बारे में.

मां गंगा को धरती पर क्यों आना पड़ा?

पौराणिक कथाओं के अनुसार मां गंगा भी अन्य देवी-देवताओं की तरह स्वर्गलोक में रहा करती थीं. एक बार भागीरथ ने अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाने के लिए मां गंगा को धरती पर लाने का दृढ़ संकल्प कर लिया था. अपने संकल्प को पूरा करने के लिए भागीरथ ने घोर तपस्या और मां गंगा को प्रसन्न किया. जिसके बाद खुश होकर मां गंगा भागीरथ की मनोकामना पूरी करने के लिए धरती पर आने को तैयार हुईं.

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लेकिन अब समस्या यह थी कि मां गंगा सीधे धरती पर नहीं जा सकती थीं क्योंकि उनके तेज वेग को सहन करने की क्षमता धरती में नहीं थी. इसकी वजह से पूरी सृष्टि गंगा के प्रवाह से नष्ट हो सकती थी. मां गंगा की इस समस्या का हल जानने के लिए भागीरथ ब्रह्मा जी के पास पहुंचे और अपनी समस्या बताई. ब्रह्मा जी ने कहा कि अगर भोलेनाथ को प्रसन्न कर दिया जाए तो इस समस्या का भी समाधान मिल जाएगा.

शिवजी की जटाओं से क्यों बहती है गंगा?

ब्रह्मा जी की बात सुनकर भागीरथ ने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या आरंभ कर दी. भगवान शिव ने उनकी कठोर से प्रसन्न होकर दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा. भागीरथ ने भोलेनाथ के साथ अपनी सारी व्यथा सुना दी. जिसके बाद भागीरथ की समस्या का हल करने के लिए भोलेनाथ ने अपनी जटाओं को खोल दिया और मां गंगा जटाओं में समाने को कहा. मां गंगा देवलोक से भगवान शिव की जटाओं में समा गईं और इससे उनका वेग भी कम हो गया. जिसके बाद उन्होंने धरती पर आकर लोगों का उद्धार किया. भगवान शिव ने मां गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया है इसलिए उन्हें गंगाधर नाम से भी जाना जाता है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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