महालक्ष्मी व्रत: जिस तरह सावन का महीना भगवान शंकर को समर्पित है, ठीक उसी प्रकार अगहन महीने में मां लक्ष्मी के पूजन को शुभ माना जाता है. अगहन मास को मार्गशीर्ष मास भी कहा जाता है. अगहन मास के पहले गुरुवार को महालक्ष्मी का व्रत और पूजन होगा. 24 नवंबर को अगहन मास का शुभारंभ हो चुका है.
आमतौर पर गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है, पर अगहन के महीने में गुरुवार को मां लक्ष्मी की धूमधाम से पूजा होती है.
महालक्ष्मी व्रत विधि:
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1. सुबह-सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें.
2. घर के द्वार, आंगन और पूजा स्थान पर चावल के आटे के घोल से अल्पना बनाएं. अल्पना में मां लक्ष्मी का पैर जरूर बनाएं.
3. इसके बाद मां लक्ष्मी का आसन सजाएं. मां लक्ष्मी का आसन या सिंहासन सजाने के लिए आम का पत्ता, आंवले का पत्ता और धान की बालियों का इस्तेमाल करें.
5. सबसे पहले कलश और भगवान गणेश की पूजा करें. इसके बाद मां लक्ष्मी का पूजन करें.
6. मां लक्ष्मी को विशेष प्रकार के पकवानों का भोग लगाएं. ऐसी मान्यता है कि अगहन महीने के हर गुरुवार को अलग-अलग पकवान चढ़ाने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
7. शाम को मां लक्ष्मी की दोबारा पूजा करें और दीप जलाएं. घर के बाहर और आंगन में भी दीप रखें.
8. पूजन के बाद घर की बहू-बेटियों और आस पड़ोस की महिलाओं भोजन कराएं.
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