बंगाल: 'महालया' के अवसर पर लाखों लोगों ने किया ‘तर्पण’, अधिमास के चलते एक महीने बाद होगी दुर्गा पूजा

कोविड-19 महामारी के बीच राज्यभर में लाखों लोगों ने हुगली और अन्य नदियों तथा जलाशयों के किनारे अपने पुरखों का तर्पण किया.

Published: September 17, 2020 2:56 PM IST

By India.com Hindi News Desk | Edited by Deepika Negi

बंगाल: 'महालया' के अवसर पर लाखों लोगों ने किया ‘तर्पण’, अधिमास के चलते एक महीने बाद होगी दुर्गा पूजा
Durga Puja (Representational Image)

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में बृहस्पतिवार को महालया के अवसर पर लाखों लोगों ने ‘तर्पण’ किया. हालांकि, इस वर्ष दुर्गा पूजा महोत्सव, अधिमास के कारण एक महीने बाद शुरू होगा. कोविड-19 महामारी के बीच राज्यभर में लाखों लोगों ने हुगली और अन्य नदियों तथा जलाशयों के किनारे अपने पुरखों का तर्पण किया. आकाशवाणी पर सुबह देवी दुर्गा को समर्पित महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का प्रसारण किया गया.

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आकाशवाणी पर महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र के पाठ का सीधा प्रसारण पहली बार 1930 के दशक में किया गया था जिसके बाद प्रतिवर्ष महालया के अवसर पर इसका प्रसारण किया जाता है. हुगली के विभिन्न घाटों पर कोई अप्रिय घटना न हो इसलिए जल यातायात पुलिस ने कड़ी निगरानी रखी थी. अधिकारियों ने कहा कि कोलकाता के 18 घाटों पर तर्पण किए जाने के दौरान उचित सुरक्षा व्यवस्था का प्रबंध किया गया. पितृ पक्ष के अंतिम दिन, परिवार के वरिष्ठ जन अपने पुरखों को जल देकर उन्हें ‘तृप्त’ करते हैं, इस अनुष्ठान को तर्पण कहा जाता है.

कोलकाता पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को घाटों पर तैनात किया गया है जबकि नागरिक पुलिस स्वयंसेवियों को सामाजिक दूरी का पालन कराने के लिए तैनात किया गया है. पुलिस ने कहा कि घाटों के आसपास सड़कों पर वाहनों का आवागमन भी प्रतिबंधित है. महालया पर मूर्तिकार, देवी दुर्गा की प्रतिमाओं की ऑंखें बनाते हैं और इस परंपरा को ‘चोखु दान’ कहा जाता है. इस साल दुर्गा पूजा एक महीने बाद शुरू होने के कारण यह परंपरा नहीं हुई. बंगाली संवत में कार्तिक महीना शुक्रवार को शुरू हो रहा है लेकिन ‘मलमास’ या ‘अधिमास’ होने के कारण दुर्गा पूजा का पर्व 22 अक्टूबर से शुरू होगा. इस वर्ष 17 सितंबर को महालया के साथ विश्वकर्मा पूजा का उत्सव भी मनाया गया.

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Published Date: September 17, 2020 2:56 PM IST