नई दिल्‍ली: गुप्त नवरात्रि के अंतिम दिन यानी नवमी तिथि को श्री महानंदा नवमी पर्व मनाया जाता है. माघ महीने में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से गुप्त नवरात्र की शुरूआत होती है और इसमें नवमी के दिन महानंदा नवमी का व्रत किया जाता है. ऐसी मान्‍यता है कि इस दिन पूजा और व्रत करने से दरिद्रता, रोग, संताप आदि का नाश होता है. बुरी शक्तियां दूर होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है. इस वर्ष यह 14 फरवरी गुरुवार को अर्थात आज मनाई जा रही है.

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यह है महत्‍व
श्री महानंदा नवमी पर पूजा के स्थान पर एक दीपक जलाकर ओम हीं महालक्ष्मैय नमः मंत्र का जाप करने से जीवन में सुखों का आगमन एवं कष्टों की कमी होती है. घर का कूड़ा करकट एकत्रित कर उसे किसी घर से बाहर करना चाहिए. इसे लक्ष्मी का विसर्जन कहा जाता है. विधि-विधान से स्नान ध्यान कर पूजा कर महालक्ष्मी का हाथ जोड़कर आहवान करने से वे जरूर ही घर में आती हैं और अपने आशीर्वाद से आपको धन-धान्य से समृद्ध कर देती हैं.

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महानंदा नवमी की पूजा
1. ब्रह्म मुहूर्त में घर का कूड़ा-कचरा इकट्‍ठा करके सुपड़ी (सूपे) में रखकर घर के बाहर करना चाहिए. इसे अलक्ष्मी का विसर्जन कहा जाता है. तत्पश्चात हाथ-पैर धोकर दरवाजे पर खड़े होकर श्री महालक्ष्मी का आवाहन करना चाहिए.
2. इस दिन पूजन स्थान के बीचोबीच एक बड़ा अखंड दीया जलाना चाहिए.
3. रात्रि जागरण करना चाहिए.
4. महालक्ष्मी मंत्र- ‘ॐ ह्रीं महालक्ष्म्यै नम:’ का जप करना चाहिए.
5. रात्रि में पूजा के पश्‍चात व्रत का पारण करना चाहिए.
6. पौराणिक शास्त्रों में नवमी के दिन कुंआरी कन्या का पूजन करके उससे आशीर्वाद लेना विशेष शुभ माना गया है. अत: नवमी तिथि को कन्या भोज तथा उनके चरण अवश्‍य छूने चाहिए.
7. गुप्त नवरात्रि में खासकर ‘श्री’ यानी महालक्ष्मी देवी की विधिवत पूजा कर व्रत-उपवास रखकर कुंआरी कन्याओं को भोजन कराना चाहिए तथा मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करके हवन करने से घर का दारिद्रय दूर होकर घर में लक्ष्मी व धन का आगमन होता है तथा जीवन सुख-संपन्नता से परिपूर्ण हो जाता है.

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