Maharishi Dayanand Saraswati Jayanti 2021 Quotes:  महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती  ( Maharishi Dayanand Saraswati )आधुनिक भारत के महान चिन्तक, समाज-सुधारक, तथा आर्य समाज के संस्थापक थे. उनके बचपन का नाम ‘मूलशंकर’ ईश्वर भक्त (आज्ञा पालक) थे, उन्होंने वेदों के प्रचार और आर्यावर्त को स्वंत्रता दिलाने के लिए मुम्बई में आर्यसमाज की स्थापना की. वे एक संन्यासी तथा एक चिंतक थे. उन्होंने वेदों की सत्ता को सदा सर्वोपरि माना. ‘वेदों की ओर लौटो’ यह उनका प्रमुख नारा था. स्वामी दयानंद ने वेदों का भाष्य किया इसलिए उन्हें ‘ऋषि’ कहा जाता है. स्वामी दयानंद सरस्वती ने बाल विवाह, सती प्रथा जैसी कुरीतियों को दूर करने में अपना खास योगदान दिया है. उन्होंने वेदों को सर्वोच्च माना और वेदों का प्रमाण देते हुए हिंदू समाज में फैली कुरीतियों का विरोध किया. आइए जानते हैं स्वामी दयानंद सरस्वती के अनमोल विचार (  Maharishi Dayanand Saraswati Jayanti 2021 Quotes)…

– नुकसान से निपटने में सबसे जरूरी चीज है उससे मिलने वाले सबक को ना भूलना. वो आपको सही मायने में विजेता बनाता है.

– मनुष्यों के भीतर संवेदना है, इसलिए अगर वो उन तक नहीं पहुंचता जिन्हें देखभाल की ज़रुरत है तो वो प्राकृतिक व्यवस्था का उल्लंघन करता है.

– सबसे उच्च कोटि की सेवा ऐसे व्यक्ति की मदद करना है जो बदले में आपको धन्यवाद कहने में असमर्थ हो.

– आप दूसरों को बदलना चाहते हैं ताकि आप आज़ाद रह सकें. लेकिन, ये कभी ऐसे काम नहीं करता. दूसरों को स्वीकार करिए और आप मुक्त हैं.

– प्रबुद्ध होना- ये कोई घटना नहीं हो सकती. जो कुछ भी यहां है वह अद्वैत है. ये कैसे हो सकता है? यह स्पष्टता है.

– जीवन में मृत्यु को टाला नहीं जा सकता. हर कोई ये जानता है, फिर भी अधिकतर लोग अंदर से इसे नहीं मानते- ‘ये मेरे साथ नहीं होगा.’ इसी कारण से मृत्यु सबसे कठिन चुनौती है जिसका मनुष्य को सामना करना पड़ता है.

– भगवान का ना कोई रूप है ना रंग है. वह अविनाशी और अपार है. जो भी इस दुनिया में दिखता है वह उसकी महानता का वर्णन करता है.

– लोगों को भगवान को जानना और उनके कार्यों की नक़ल करनी चाहिए. पुनरावृत्ति और औपचारिकताएं किसी काम की नहीं हैं.