लखनऊ: संगम में अखाड़ों की शाही डुबकी लगने के बाद कुंभ का अनौपचारिक समापन हो गया है. वैसे तो महाशिवरात्रि तक कुंभ क्षेत्र में संतों और श्रद्धालुओं का जमघट रहेगा, लेकिन अखाड़ों का डेरा वसंत पंचमी के शाही स्‍नान के बाद कुंभनगरी प्रयाग से उठने लगा है. प्रयाग से उठकर अखाड़े हरिद्वार में 2021 में लग रहे कुंभ मेला में डेरा जमाने की तैयारी में जुट गए हैं. हर अखाड़े के महामंडलेश्‍वर, मंडलेश्‍वर, महंतों ने मेला छोड़ना शुरू कर दिया है. अब साधुओं का अगला पड़ाव काशी में होने वाला है, जहां सभी महाशिवरात्रि पर महादेव के धाम में गंगा में डुबकी लगाएंगे.

Mahashivratri 2019: कब है महाशिवरात्रि, जानिए शुभ मुहूर्त, व्रत का महत्व और पूजन विधि

ऐतिहासिक रहा प्रयाग कुंभ
बात प्रयाग कुंभ की करें तो यह कई मायने में ऐतिहासिक रहा. यूपी सरकार ने भव्‍य कुंभ, दिव्‍य कुंभ की संकल्‍पना को साकार करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया. प्रयाग का कुंभ कई मायने में खास रहा. कुंभ की शुरुआत में 172 देशों के राजनयिकों ने प्रयाग का भ्रमण करके उसके वैभव को करीब से देखा. वहीं कुंभ मेला आरंभ होने पर अखाड़ों ने अपनी ओर से सार्थक संदेश देने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

Durga Ashtami Date 2019: देखें मासिक दुर्गाष्‍टमी का पूरा कैलेंडर, पूजा विधि भी पढ़ें

1993 से ठप परिक्रम हुई शुरू
प्रयाग की धार्मिक-पौराणिक परंपरा को संजोनेवाली पंचकोसी परिक्रमा 1993 से ठप थी. परिक्रम बंद होने से द्वादश माधव सहित प्रयाग के धार्मिक व पौराणिक महत्‍व से लोग अंजान थे. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने परिक्रमा आरंभ कराने में अहम भूमिका निभाई. अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरिगिरि ने कुंभ शुरू होने से पहले द्वादश माधव मंदिरों की दशा सुधारने का सरकार को प्रस्‍ताव दिया. इसके बाद यूपी सरकार और प्रशासन हरकत में आया. फिर द्वादश माधव मंदिरों में शौचालय, पेयजल, बिजली आदि की व्‍यवस्‍था की गई. इस बीच महंत हरिगिरि की अगुवाई में संतों व प्रशासनिक अधिकारियों ने पंचकोसी परिक्रमा की. इसके बाद ही देश-विदेश से आए लोगों को परिक्रमा करना आसान हो पाया.

Pradosh Vrat 2019: देखें प्रदोष व्रत का पूरा कैलेंडर, जानें किस दिन की पूजा से होगी मनचाही संतान

छोटी परिक्रमा की तैयारी
पंचकोसी परिक्रमा कराने के बाद अखिल भारतीय अखाड़ परिषद प्रयाग की छोटी परिक्रमा कराने की तैयारी कर रहा है. महंत हरिगिरि बताते हैं कि पंचकोसी परिक्रमा करना सबके लिए संभव नहीं है. इसकी दूरी अधिक होने के चलते उसम काफी समय लगता है. इसको देखते हुए काशी, वृंदावन, अयोध्‍या व मथुरा की तर्ज पर प्रयाग की छोटी परिक्रमा कराई जाएगी. शहर के अंदर स्थित प्रमुख प्राचीन सिद्ध मंदिरों को उसमें शामिल किया जाएगा, जिससे लोग प्रतिदिन सुबह टहलते हुए मंदिरों का दर्शन आसानी से करके पुण्‍य अर्जित कर सकें.

धर्म की और खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.