नई दिल्ली: फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है. माना जाता है कि सृष्टि का प्रारम्भ इसी दिन से हुआ. पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग (जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है) के उदय से हुआ. ऐसे में इस साल महाशिवरात्रि पर  101 साल बाद इस त्योहार पर एक विशेष संयोग बनने जा रहा है. महाशिवरात्रि के दिन शिवयोग, सिद्धियोग और घनिष्ठा नक्षत्र का संयोग आने से त्योहार का महत्व और ज्यादा बढ़ गया है. इन शुभ संयोगों के बीच महाशिवरात्रि पर पूजा करना काफी शुभ होगा. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह इसी दिन हुआ था.Also Read - Mahashivratri 2021: अमर हैं महादेव और हर मृत्यु में मरते भी वही हैं, जानें कौन हैं शिव? कैसा है उनका आकार

 महाशिवरात्रि व्रत कब है? (When is Maha Shivaratri in Year 2021)
11 मार्च, 2021 (गुरुवार) Also Read - Mahashivratri 2021: कौन हैं महादेव, कैसे दिखते हैं भोलेनाथ? यहां जानें शिव से जुड़े सभी सवालों के जवाब

महा शिवरात्रि मुहूर्त (Mahashivratri 2021 subh muhurat) Also Read - Mahashivratri 2021 Lord Shiva Sand Art: मुंबई के जुहू बीच में सैंड आर्टिस्ट ने बनाई भगवान शिव की मनमोहक प्रतिमा, देखते रह गए लोग

महा शिवरात्रि बृहस्पतिवार, मार्च 11, 2021 को
निशिता काल पूजा समय – 00:06 से 00:55, मार्च 12
अवधि – ०० घण्टे 48 मिनट्स
१२वाँ मार्च को, शिवरात्रि पारण समय – 06:34 से 15:02
रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – 18:27 से 21:29
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – 21:29 से 00:31, मार्च 12
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय -00:31 से 03:32, मार्च 12
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 03:32 से 06:34, मार्च 12
चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ – मार्च 11, 2021 को 14:39 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त – मार्च 12, 2021 को 15:02 बजे

शिवलिंग पूजा

शिवलिंग भगवान शिव का प्रतीक है. शिव का अर्थ है– कल्याणकारी और लिंग का अर्थ है सृजन. सर्जनहार के रूप में लिंग की पूजा होती है. संस्कृत में लिंग का अर्थ है प्रतीक. भगवान शिव अनंत काल के प्रतीक हैं. मान्यताओं के अनुसार, लिंग एक विशाल लौकिक अंडाशय है, जिसका अर्थ है ब्रह्माण्ड. इसे ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है.