Mahashivratri 2021: भगवान शिव की अराधना का सबसे बड़ा पर्व महाशिवरात्रि (Mahashivratri Vrat) आने में कुछ ही दिन बाकी है. इस दिन भगवान शिव की पूजा अर्चना की जाती है और उपवास रखा जाता है. भगवान शिव (Lord Shiva) को प्रसन्न करने के लिए धतूरा, बेलपत्र चढ़ाया जाता है. इसके साथ ही भगवान शिव की पूजा में कुछ चीजें अर्पित करना मना होता है. जैसे कि केतकी के पूल और तुलसी के पत्ते. ऐसे में आइए जानते हैं आखिर क्यों ये दो चीजें भगवान शिव की पूजा में वर्जित होती हैं.Also Read - Tulsi Ke Pani Ke Vastu Tips: तुलसी के पानी से करें ये उपाय, इन समस्याओं से मिल जाएगा छुटकारा

भगवान शिव को क्यों नहीं चढ़ाएं जाते तुलसी के पत्ते (Tuldi Leaves)
माना जाता है कि पूर्व जन्म में तुलसी का नाम वृंदा था और वह जालंधर नाम के एक राक्षस की पत्नी थी. वह राक्षस वृंदा पर काफी जुल्म करता था. जालंधर को सबक सिखाने के लिए भगवान शिव ने विष्णु भगवान से आग्रह किया. तब विष्णुजी ने छल से वृंदा का पतिव्रत धर्म भंग कर दिया. बाद में जब वृंदा को यह पता चला कि भगवान विष्णु ने उनका पतिव्रत धर्म भंग किया है तो उन्होंने विष्णुजी को श्राप दिया कि आप पत्थर के बन जाओगे. तब विष्णु जी ने तुलसी को बताया कि मैं तुम्हारा जालंधर से बचाव कर रहा था, अब मैं तुम्हें श्राप देता हूं कि तुम लकड़ी की बन जाओ. इस श्राप के बाद वृंदा कालांतर में तुलसी का पौधा बन गईं. Also Read - Thyroid Home Remedies: थाइराइड को कंट्रोल करने के लिए काफी फायदेमंद होती है तुलसी, इस तरीके से करें सेवन

भगवान शिव को क्यों नहीं चढ़ाएं जाते केतकी के फूल (Ketaki Flower)
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, एक बार भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी कौन बड़ा और कौन छोटा है, इस बात का फैसला कराने के लिए भगवान शिव के पास पहुंचे. इस पर भगवान शिव ने एक शिवलिंग को प्रकट कर उन्हें उसके आदि और अंत पता लगाने को कहा. उन्होंने कहा जो इस बात का उत्तर दे देगा वही बड़ा है. इसके बाद विष्णु जी उपर की ओर चले और काफी दूर तक जाने के बाद पता नहीं लगा पाए. उधर ब्रह्मा जी नीचे की ओर चले और उन्हें भी कोई छोर न मिला. नीचे की ओर जाते समय उनकी नजर केतकी के पुष्प पर पड़ी, जो उनके साथ चला आ रहा था. उन्होंने केतकी के पुष्प को भगवान शिव से झूठ बोलने के लिए मना लिया. जब ब्रह्मा जी ने भगवान शिव से कहा कि मैंने पता लगा लिया है और केतकी के पुष्प से झूठी गवाही भी दिलवा दी तो त्रिकालदर्शी शिव ने ब्रह्मा जी और केतकी के पुष्प का झूठ जान लिया. उसी समय उन्होंने न सिर्फ ब्रह्मा जी के उस सिर को काट दिया जिसने झूठ बोला था बल्कि केतकी की पुष्प को अपनी पूजा में प्रयोग किए जाने के अधिकार से भी वंचित कर दिया. Also Read - Tulsi Face Pack: कुछ ही दिनों में चमक उठेगा चेहरा, इस तरह बनाएं तुलसी का फेस पैक