Mahavir Jayanti 2019 इस बार 17 अप्रैल, बुधवार को मनाई जाएगी. इस बार भगवान महावीर का 2617वां जन्‍मोत्‍सव मनेगा.

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भगवान महावीर का जन्म
भगवान महावीर का जन्म 599 ईसा पूर्व (BC) में बिहार के कुण्डग्राम नाम के स्थान पर हुआ था. यह स्थान वैशाली जिले में है. महावीर की मां त्रिशला रानी थीं और पिता का नाम सिद्धार्थ था. जैन पुराणों में वर्णन मिलता है कि महावीर के जन्म से पहले उनकी माता ने उनके जन्म से सम्बंधित 16 विशेष स्वप्न देखे थे.

कौन थे भगवान महावीर
भगवान महावीर अहिंसा, त्याग व समभाव की प्रतिमूर्ति थे. भगवान महावीर ने त्याग और तपस्या की शक्ति से आत्मसाक्षात्कार किया था. उनके वचनों में जीवन का सार है. करीब ढाई हजार साल पूर्व भारत एवं दुनिया के सामने जो चुनौतियां थीं, वे आज भी मौजूद हैं. बस उनका स्वरूप बदल गया है. अत्याचार, दमन, शोषण, आतंक, युद्ध, हिंसा और असत्य जैसी बुराइयां आज भी विद्यमान हैं. भगवान महावीर ने अपने वचनों में इन बुराइयों पर विजय पाने का मार्ग बताया है.

महावीर जयंती का महत्व
भगवान महावीर ने कठोर तप से अपने जीवन पर विजय प्राप्त किया था. महावीर जयंती पर श्रद्धालु जैन मंदिरों में भगवान महावीर की मूर्ति को विशेष अभिषेक कराया जाता है. महावीर को स्नान करने के बाद उनकी मूर्ति को सिंहासन या रथ पर बैठाकर हर्सोल्लास के साथ जुलूस निकाला जाता है. इस महाजुलूस में बड़ी संख्यां में जैन धर्मावलम्बी शामिल होते हैं.

दरअसल, इस दिन भगवान महावीर का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन समाज में उनके संदेशों का प्रचार करते हैं. महावीर ने अहिंसा का संदेश दिया था. उन्होंने कहा था कि अहिंसा ही सबसे बड़ा धर्म है. खुद जीओ और दूसरों को भी जीने दो. हर प्राणी के प्रति दया का भाव रखो. दया ही अहिंसा है.

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