Makar Sankranti 2019: मकर संक्रांति के अवसर पर गंगा सागर में स्‍नान करने के लिए 16 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच गए हैं. यहां पर हर साल मकर संक्रांति के दिन लाखों हिंदू तीर्थयात्री गंगा नदी और बंगाल की खाड़ी के संगम पर डुबकी लगाने के लिए इकट्ठा होते हैं और कपिल मुनि मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं.

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गंगा सागर का पौराणिक महत्‍व
पुराणों के अनुसार कपिल मुनि के श्राप के कारण ही राजा सगर के 60 हज़ार पुत्रों की इसी स्थान पर तत्काल मृत्यु हो गई थी. उनके मोक्ष के लिए राजा सगर के वंश के राजा भगीरथ गंगा को पृथ्वी पर लाए थे और गंगा यहीं सागर से मिली थीं. कहा जाता है कि एक बार गंगा सागर में डुबकी लगाने पर 10 अश्वमेध यज्ञ और एक हज़ार गाय दान करने के समान फल मिलता है. जहां गंगा-सागर का मेला लगता है, वहां से कुछ दूरी उत्तर वामनखल स्थान में एक प्राचीन मंदिर है. उसके पास चंदनपीड़िवन में एक जीर्ण मंदिर है और बुड़बुड़ीर तट पर विशालाक्षी का मंदिर है.

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गंगासागर तीर्थ का महत्‍व
गंगासागर तीर्थ एवं मेला महाकुंभ के बाद मनुष्यों का दूसरा सबसे बड़ा मेला है. यह मेला वर्ष में एक बार लगता है. यह द्वीप के दक्षिणतम छोर पर गंगा डेल्टा में गंगा के बंगाल की खाड़ी में पूर्ण विलय (संगम) के बिंदु पर लगता है. बहुत पहले इस स्थान पर गंगा जी की धारा सागर में मिलती थी, किंतु अब इसका मुहाना पीछे हट गया है. अब इस द्वीप के पास गंगा की एक बहुत छोटी सी धारा सागर से मिलती है. यह मेला पांच दिन चलता है. इसमें स्नान मुहूर्त तीन ही दिनों का होता है. यहां गंगाजी का कोई मंदिर नहीं है, बस एक मील का स्थान निश्चित है, जिसे मेले की तिथि से कुछ दिन पूर्व ही संवारा जाता है. यहां स्थित कपिल मुनि का मंदिर सागर बहा ले गया, जिसकी मूर्ति अब कोलकाता में रहती है और मेले से कुछ सप्ताह पूर्व पुरोहितों को पूजा अर्चना हेतु मिलती है. अब यहां एक अस्थायी मंदिर ही बना है. इस स्थान पर कुछ भाग चार वर्षों में एक बार ही बाहर आता है, शेष तीन वर्ष जलमग्न रहता है. इस कारण ही कह जाता है…बाकी तीरथ चार बार, गंगा-सागर एक बार.

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‘गंगा सागर मेले’ में करीब 18 से 20 लाख भक्तों के आने की संभावना
भारतीय नौसेना ने आगामी ‘मकर संक्रांति’ मेले के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति में बचाव एवं राहत अभियान के लिए गंगासागर में कुशल गोताखोरों की टीम तैनात की है. एक अधिकारी ने बताया कि अगले एक हफ्ते में ‘गंगा सागर मेले’ में करीब 18 से 20 लाख भक्तों के आने की संभावना है. नौसेना के एक अधिकारी ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी, भारतीय नौसेना ने मेले के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए आठ से 17 जनवरी तक गोताखोरों की विशिष्ट टीम तैनात की है. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार के आग्रह पर पूर्वी नौसेना कमान के 10 गोताखोरों की टीम तैनात की गई है. इसके अलावा, एनडीआरएफ और भारतीय तटरक्षक बल के कर्मियों को भी सागर द्वीप पर इस दौरान तैनात किया जा सकता है.

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