Makar Sankranti 2020: मकर संक्रांति का हिंदू धर्म में काफी महत्‍व है. इस दिन को ‘खिचड़ी’ भी कहा जाता है. खिचड़ी बनाने और खाने का ये खास पर्व है. Also Read - Makar Sankranti 2021: सदियों से गोरखनाथ मंदिर में Khichdi पर होता आया है ये काम, जानें महत्व

इस दिन खिचड़ी बनाने, खाने, खिलाने का रिवाज है. इसे बेहद शुभ माना जाता है. Also Read - Makar Sankranti 2021 Date: मकर संक्रांति तिथि, इस साल बन रहे बेहद शुभ योग

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खिचड़ी का महत्‍व
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाने की परंपरा की शुरूआत हुई. ये परंपरा शुरू की बाबा गोरखनाथ ने. खिलजी के आक्रमण के समय नाथ योगियों को खिलजी से संघर्ष के कारण भोजन बनाने का समय नहीं मिल पाता था. इससे योगी भूखे रह जाते थे. जब गुरु गोरखनाथ ने ये देखा, तो इस समस्या का हल निकालने के लिए उन्‍होंने दाल, चावल और सब्जी को एक साथ पकाने की सलाह दी. इसे पकाया गया तो ये काफी स्‍वादिष्‍ट और सुपाच्‍य था. बाबा गोरखनाथ ने इस व्यंजन का नाम खिचड़ी रखा. इससे नाथ योगियों की भोजन की समस्या का हल हो गया. खिलजी के आतंक को उन्‍होंने दूर किया. इसीलिए गोरखपुर में मकर संक्रांति को विजय दर्शन पर्व के रूप में भी मनाया जाता है.

खिचड़ी की परंपरा
मकर संक्रांति में शुभ मुहूर्त पर स्‍नान और दान-पुण्य करने का महत्‍व है. इस दिन खिचड़ी बनाई जाती है. भगवान को चढ़ाई जाती है. कई जगहों पर मृत पूर्वजों की आत्‍मा की शांति के लिए खिचड़ी दान करने की भी परंपरा है

कैसी खिचड़ी खाएं
चावल को चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है और उड़द की दाल को शनि का. इसलिए इस दिन उड़द के दाल से खिचड़ी बनाई जाती है. ऐसी मान्‍यता है कि इस खिचड़ी को खाने से आरोग्‍य की प्राप्ति होती है. मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने से कुंडली में ग्रहों की स्थिति मजबूत होती है.

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