Makar Sankranti 2020: मकर संक्रांति पर स्‍नान-दान की हजारों साल पुरानी पंरपरा है. हिंदू धर्म में इस दिन को मोक्ष प्रदान करने वाला दिन माना जाता है.

इस दिन खिचड़ी बनाने, खाने, खिलाने का भी रिवाज है. यही वजह है कि उत्‍तर भारत में इस दिन को ‘खिचड़ी’ के नाम से भी जाना जाता है.

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बाबा गोरखनाथ से नाता
ऐसा कहा जाता है कि उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाने की परंपरा की शुरूआत हुई. ये परंपरा शुरू की बाबा गोरखनाथ ने. बाबा गोरखनाथ को भगवान शिव का अंश भी माना जाता है. बताया जाता है कि खिलजी के आक्रमण के समय नाथ योगियों को खिलजी से संघर्ष के कारण भोजन बनाने का समय नहीं मिल पाता था. इससे योगी भूखे रह जाते थे.

जब गुरु गोरखनाथ ने ये देखा, तो इस समस्या का हल निकालने के लिए उन्‍होंने दाल, चावल और सब्जी को एक साथ पकाने की सलाह दी. इसे पकाया गया तो ये काफी स्‍वादिष्‍ट और सुपाच्‍य था. बाबा गोरखनाथ ने इस व्यंजन का नाम खिचड़ी रखा. इससे नाथ योगियों की भोजन की समस्या का हल हो गया. खिलजी के आतंक को उन्‍होंने दूर किया. इसीलिए गोरखपुर में मकर संक्रांति को विजय दर्शन पर्व के रूप में भी मनाया जाता है.

खिचड़ी मेला
क्‍या आपको पता है कि गोरखपुर स्थित बाबा गोरखनाथ के मंदिर के पास हर साल मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी मेला लगता है. कई दिनों तक ये मेला चलता है. इसमें बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है. इसे प्रसाद रूप में बांटा भी जाता है.

खिचड़ी की परंपरा
मकर संक्रांति में शुभ मुहूर्त पर स्‍नान और दान-पुण्य करने का महत्‍व है. इस दिन खिचड़ी बनाई जाती है. भगवान को चढ़ाई जाती है. कई जगहों पर मृत पूर्वजों की आत्‍मा की शांति के लिए खिचड़ी दान करने की भी परंपरा है.

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