Makar Sankranti 2021: मकर संक्रांति का पर्व पूरे देश में मनाया जाता है. इस पर्व को कई अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है. उत्तर प्रदेश के सुप्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर में भी हर साल ये पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. सदियों से इन परंपराओं को निभाया जा रहा है. Also Read - भाजपा में शामिल होने के 24 घंटे के अंदर ही पूर्व IAS अरविंद शर्मा यूपी विधान परिषद के लिए नामित

खिचड़ी मेला
गोरखपुर का गोरखनाथ मंदिर. इसे नाथ पीठ (गोरक्षपीठ) का मुख्यालय भी माना जाता है. उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस पीठ के पीठाधीश्वर हैं. मंदिर परिसर में मकर संक्रांति के दिन से माह भर तक चलने वाला खिचड़ी मेला यहां का प्रमुख आयोजन है. इसका शुमार उत्तर भारत के बड़े आयोजनों में होता हैं. इस दौरान उत्तर प्रदेश, बिहार, नेपाल और अन्य जगहों से लाखों लोग गुरु गोरक्षनाथ को खिचड़ी चढ़ाने यहां आते हैं. Also Read - पूर्व IAS अरविंद कुमार शर्मा भाजपा में हुए शामिल, दो दिन पहले लिया था VRS, हो सकते हैं यूपी के तीसरे डिप्टी सीएम

खिचड़ी की बरसात
बतौर पीठाधीश्वर पहली खिचड़ी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चढ़ाते हैं. इसके बाद नेपाल नरेश की ओर से भेजी गई खिचड़ी चढ़ती है. इसके बाद बारी आम लोगों की आती है. फिर क्या गुरु गोरखनाथ के जयकारे के बीच खिचड़ी की बरसात ही हो जाती है. बाबा गोरक्षनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की यह परंपरा सदियों पुरानी है. Also Read - Makar Sankranti Snan: पवित्र नदियों में हजारों ने लगाई डुबकी, जानें क्या रहा मंदिरों का हाल

त्रेता युग से हुई थी शुरुआत
मान्यता है कि त्रेता युग में सिद्ध गुरु गोरक्षनाथ भिक्षाटन करते हुए हिमाचल के कांगड़ा जिले के ज्वाला देवी मंदिर गएं यहां देवी प्रकट हुईं और गुरु गोरक्षनाथ को भोजन का आमंत्रण दिया. वहां तामसी भोजन देखकर गोरक्षनाथ ने कहा, मैं भिक्षाटन में मिले चावल-दाल को ही ग्रहण करता हूं. इस पर ज्वाला देवी ने कहा, मैं चावल-दाल पकाने के लिए पानी गरम करती हूं. आप भिक्षाटन कर चावल-दाल लाइए.

गुरु गोरक्षनाथ यहां से भिक्षाटन करते हुए हिमालय की तराई स्थित गोरखपुर पहुंचे. उस समय इस इलाके में घने जंगल थे. यहां उन्होंने राप्ती और रोहिणी नदी के संगम पर एक मनोरम जगह पर अपना अक्षय भिक्षापात्र रखा और साधना में लीन हो गए. इस बीच खिचड़ी का पर्व आया.

एक तेजस्वी योगी को साधनारत देख लोग उसके भिक्षापात्र में चावल-दाल डालने लगे, पर वह अक्षयपात्र भरा नहीं. इसे सिद्ध योगी का चमत्कार मानकर लोग अभिभूत हो गए. उसी समय से गोरखपुर में गुरु गोरक्षनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा जारी है.

नेपाल से आती है खिचड़ी
इस दिन हर साल नेपाल-बिहार व पूर्वांचल के दूर-दराज इलाकों से श्रद्धालु गुरु गोरक्षनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने आते हैं. पहले वे मंदिर के पवित्र भीम सरोवर में स्नान करते हैं. खिचड़ी मेला माह भर तक चलता है. इस दौरान के हर रविवार और मंगलवार का खास महत्व है. इन दिनों मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं.

सूर्योपासना का पर्व
मकर संक्रांति मूल रूप से सूर्योपासना का पर्व है. ऋग्वेद के अनुसार सूर्य इस जगत की आत्मा हैं. ज्योतिष विद्या के अनुसार सूर्य साल भर सभी 12 (राशियों) में संक्रमण करता है. एक से दूसरी राशि में सूर्य के प्रवेश ही संक्रांति कहलाता है. इस क्रम में जब सूर्य, धनु से मकर राशि में प्रवेश करता है तो मकर संक्रांति का पुण्यकाल आता है. इसमें स्नान-दान का खास महत्व है.
(एजेंसी से इनपुट)