Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति के दिन क्यों उड़ाते हैं पतंग? जानिए संक्रांति और पतंग के बीच का कनेक्शन

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति के दिन आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें दिखाई देती हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि आखिर मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा क्यों है?

Published date india.com Published: January 12, 2026 3:57 PM IST
Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति के दिन क्यों उड़ाते हैं पतंग? जानिए संक्रांति और पतंग के बीच का कनेक्शन

Makar Sankranti 2026: हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का पर्व बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है और इस दिन सूर्य देव का पूजन किया जाता है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार मकर संक्रांति के दिन ग्रहों के राजा सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण होते हैं. मकर संक्रांति ऋतु परिवर्तन का पर्व है और कहते हैं कि इसके बाद दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं. इस साल मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा. इस​ दिन खिचड़ी बनाने व दान करने की परंपरा है. साथ ही मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की भी परंपरा है और इस दिन आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भरा हुआ नजर आता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मकर संंक्रांति के दिन आखिर पतंग क्यों उड़ाई जाती है? आइए जानते हैं कि मकर संक्रांति और पतंग के बीच क्या है रिश्ता.

मकर संक्रांति के दिन क्यों उड़ाते हैं पतंग?

मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदी में स्नान व दान की परंपरा है. इस दिन तिल, गुड़ और खिचड़ी का दान करना शुभ माना गया है. इसके अलावा मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की भी परंपरा है और कई जगह पतंगबाजी की प्रतियोगिताएं भी आयोजित होती हैं. इसलिए इसे खिचड़ी व पतंग पर्व भी कहा जाता है. मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने के पीछे पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही मान्यताएं छिपी हुई हैं.

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भगवान राम से जुड़ी है यह परंपरा

मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसके पीछे एक पौराणिक कथा छिपी हुई है. पौराणिक कथा के अनुसार मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा भगवान श्री राम के युग से चली आ रही है. एक बार प्रभु श्रीराम पतंग उड़ा रहे थे और पतंग उड़ते हुए इंद्रलोक में पहुंच गई. जिसे देखकर सभी देवी-देवता बहुत ही प्रसन्न हुए मकर संक्रांति के दिन सबसे पहले भगवान श्रीराम में मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाई थी और उनकी पतंग उड़ते-उड़ते इंद्रलोक में जा पहुंची थी. जिसे देखकर सभी देवी-देवता प्रसन्न हुए, कहते हैं कि उस दिन मकर संक्रांति का दिन था और तभी से इस दिन पतंग उड़ाने की परंपरा चली आ रही है.

पतंग उड़ाने का वैज्ञानिक महत्व

मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने के पीछे वैज्ञानिक महत्व भी माना गया है. इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और यदि इस दिन पतंग उड़ाई से कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं. मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने से व्यक्ति को सूर्य की गर्मी प्राप्त होती है और सर्दियों के मौसम में सूर्य की रोशनी व गर्मी मिलना सेहत के लिए बहुत ही जरूरी मानी गई है. इसके अलावा पतंग उड़ाते समय हाथ व पांव के साथ ही दिमाग का भी उपयोग किया जाता है. ऐसा करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना गया है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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