Makar Sankranti 2026: इस बार मकर संक्रांति के दिन भूलकर भी न करें खिचड़ी का दान! नहीं तो बन जाएंगे पाप के भागी

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व भी कहा जाता है और इस ​दिन खिचड़ी दान करने का विशेष महत्व माना गया है.

Published date india.com Published: January 13, 2026 4:13 PM IST
Makar Sankranti 2026: इस बार मकर संक्रांति के दिन भूलकर भी न करें खिचड़ी का दान! नहीं तो बन जाएंगे पाप के भागी

Makar Sankranti 2026: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब ग्रहों के राजा सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व माना गया है और इस दिन सूर्य देव का पूजन किया जाता है. ​कई जगहों पर मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व भी कहा जाता है और इस दिन खिचड़ी खाने व दान करने की परपंरा है. लेकिन इस साल मकर संक्रांति के मौके पर आप चाहकर भी खिचड़ी दान नहीं कर पाएंगे. आइए जानते हैं आखिर ऐसी क्या वजह है जो मकर संक्रांति पर खिचड़ी दान करना अशुभ होगा?

मकर संक्रांति पर न करें खिचड़ी का दान

इस साल मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2025 को मनाया जाएगा और इसी दिन माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि भी है जिसे षटतिला एकादशी कहते हैं. मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी दान करने का ​विशेष महत्व माना गया है लेकिन एकादशी के दिन चावल का सेवन व दान वर्जित माना गया है. ऐसे में लोगों के मन में कंफ्यूजन है कि मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी का दान करें या ना करें?

तो बता दें कि इस दिन मकर संक्रांति के दिन भूलकर भी खिचड़ी का दान न करें. क्योंकि इसी दिन षटतिला एकादशी का व्रत भी रखा जाएगा और इस दिन चावल को स्पर्श करना भी वर्जित होता है. इसलिए मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी का दान न करें. इसके बजाय मकर संक्रांति के दिन तिल, मूंगफली, रेबड़ी, गजक, तिल से बनी मिठाईयां, कंबल, कपड़े आदि का दान अवश्य करें.

कब करें खिचड़ी का दान?

इस साल मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी होने के कारण खिचड़ी का दान नहीं कर सकते. ऐसे में अगले दिन यानि 15 जनवरी 2026 को खिचड़ी का दान अवश्य करें. एकादशी के व्रत का पारण 15 जनवरी को द्वादशी के दिन किया जाएगा और इस दिन मकर संक्रांति के नाम से खिचड़ी का दान करना शुभ होगा.

मकर संक्रांति स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

मकर संक्रांति के दिन पुण्यकाल को सर्वश्रेष्ठ माना गया है और पुण्यकाल में स्नान व दान का विशेष महत्व होता है. बता दें कि 14 जनवरी को पुण्यकाल दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर शुरू होगा और शाम 5 बजकर 45 मिनट पर समाप्त होगा. वहीं महापुण्यकाल की बात करें तो वह दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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