नई दिल्ली: हिन्दू पंचांग के अनुसार यह ज्येष्ठ का महीना चल रहा है. ज्येष्ठ का महीना मई में आता है. लेकिन इस बार साल 2018 में मलमास (अधिक मास) है, इसके चलते ज्येष्ठ का महीना एक महीने अधिक चलेगा. इस बार मलमास 16 मई से शुरू हो गया है जो 13 जून तक रहेगा. ऐसा माना जाता है कि अधिकमास या मलमास में किए गए धार्मिक कार्यों का किसी भी अन्य माह में किए गए पूजा-पाठ से 10 गुना अधिक फल मिलता है. इस पूरे महीने में भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है. इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. Also Read - 16 दिसंबर से धनु मलमास शुरू, सूर्य कर रहे हैं धनु राशि में प्रवेश, जानिये क्या होगा असर

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अंग्रेजी कैलेंडर की तरह ही हिन्दू पंचांग में भी 12 महीने होते हैं. इसका आधार सूर्य और चन्द्रमा होता है. सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है. इन दोनों वर्षों के बीच करीब 11 दिनों का फासला होता है. यह फर्क तीन साल में एक महीने के बराबर हो जाता है. इसी अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अस्तित्व में आता है. बढ़ने वाले इस महीने को ही अधिक कहा जाता है. आम भाषा में इसे मलमास कहा जाता है. इसे पुरूषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है. इस बार आषाढ़ में अधिक है. यह 16 मई से 13 जून तक रहेगा.

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मलमास के महीने में यह काम ना करें:

मलमास में कोई भी शुभ कार्य नहीं होता. यानी इस दौरान शादी, सगाई, लगन, गृह प्रवेश, नए घर का निर्माण आदि जैसे काम नहीं होते. यह आध्यात्मिक महीना है, इसलिए इसमें भौतिक जीवन से संबंधित कार्य करने की मनाही होती है. लेकिन जो काम पहले से ही तय है वह काम आप कर सकते हैं.

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क्या करें:

इस महीने में उपवास, पूजा-पाठ, ध्यान, भजन, कीर्तन, मनन करना बहुत लाभकारी होता है. मान्यता यह भी है कि इस महीने में जो भी जातक यज्ञ- हवन, श्रीमद् देवीभागवत, श्री भागवत पुराण, श्री विष्णु पुराण, भविष्योत्तर पुराण आदि का श्रवण, पठन, मनन करता है, उसे विशेष फल की प्राप्ति होती है. इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा करने और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करने से मनचाहा आशीर्वाद मिलता है और पापों का नाश होता है.