मार्गशीर्ष पूर्णिमा: मार्गशीर्ष यानी की अगहन का महीना. इस महीने को पुराणों के हिसाब से सबसे पवित्र महीना माना जाता है. इसी महीने में भगवान श्री कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था. पुराणों में बताया गया है कि इस महीने स्नान करना भगवान विष्णु की पूजा करना अतिफलदायी होता है. इस साल मार्गशीर्ष पूर्णिमा 12 दिसंबर को है. इस दिन स्नान-दान करने से उतना ही पुण्य मिलता है जितना कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान करने से मिलता है. इस दिन गीता का पाठ करने से आपकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. साथ ही आपके पितरों को तृप्ति भी मिलती है. इस दिन पूजा-पाठ करने से दोष और पाप खत्म होते हैं.

पूजा विधि

1- मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर आपका प्रयास यह होना चाहिए कि किसी तीर्थ स्थली पर जाकर नहाया जाए. अगर यह नहीं हो पाए तो आपको सूर्योदय से पहले उठकर गंगाजल का इस्तेमाल कर पानी से स्नान करना चाहिए.
2- स्नान के बाद आपको व्रत का संकल्प लेना होगा और पूरे दिन इसे निष्ठा के साथ निभाना चाहिए.
3- इस दिन आपको वस्त्रों और खाने पीने की चीजों का दान करना चाहिए.
4- इस दिन झूठ बोलने से बचना चाहिए साथ ही दिन में सोने से भी परहेज करना चाहिए.
5- गरीबों और ब्राम्हणों को भोजन करवाएं.
6- प्याज, लहसुन या किसी भी प्रकार के मादक पदार्थ के सेवन से बचना चाहिए.
7- इस दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा करें.
8- ये सब करने से भक्तों को मानसिक शांति मिलती है और कष्टों का निवारण होता है.

इन तिथियों का है अपना महत्व

10 दिसंबर- इस दिन काशी में पिशाच मोचन पर श्राद्ध करने से पुर्खों को पिशाच योनी से मुक्त मिलती है. इस दिन शिव चतुर्दशी भी है.
11 दिसंबर- इस दिन को श्री दत्तात्रेय जयंती है. इस दिन व्रत पूर्णिमा भी है.
12- दिसंबर- मार्गशीर्ष पूर्णिमा यानी स्नान-दान पूर्णिमा.
13 दिसंबर- इस दिन से पौष कृष्ण का शुभारंभ होगा.
14 दिसंबर- इस दिन रात के 8 बजकर 3 मिनट से भद्रा रात्रि की शुरुआत होगी.
15 दिसंबर- इस दिन संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत है.
16 दिसंबर- इस दिन शाम के वक्त 3 बजकर 10 मिनट से सूर्य के धनु संक्रांति शुरू होगा. यह अगले दिन सुबह 3 बजकर 5 मिनट तक रहेगा. इसी दिन से खरमास माह की प्रारम्भ होगा.