Meru Trayodashi 2020 का दिन जैन धर्म के लिए काफी खास होता है. इसे हर साल माघ महीने में मनाया जाता है. इस दिन को जैन धर्म के पहले तीर्थंककर ऋषभदेव के कारण महत्वपूर्ण दिन के रूप में मनाया जाता है.

Meru Trayodashi 2020 Date

जैन कैलेंडर के अनुसार, मेरू त्रयोदिशी पौष माह की कृष्ण पक्ष त्रयोदिशी को मनाई जाती है. मेरू त्रयोदिशी 22 जनवरी, बुधवार को है. इस दिन भगवान ऋषभदेव को निर्वाण प्राप्त हुआ था. उनके माध्यम से ही जैन धर्म को अपने 24 तीर्थंकर मिले.

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मेरू त्रयोदशी महत्‍व

मेरू त्रयोदिशी का पर्व पिंगल कुमार (pingal kumar) की स्मृति में मनाया जाता है. माना जाता है कि पिंगल कुमार ने 5 मेरू का संकल्प पूरा किया था और 20 नवकार वाली के साथ ऊँ रहीम्, श्रीम् अदिनाथ पारंगत्या नम: मंत्र का जाप किया था. मेरू त्रयोदिशी भगवान ऋषभनाथ (ऋषभदेव) के निर्वाण कल्याणक का दिन है जिससे इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है.

क्‍यों खास ये दिन

जैन धर्मग्रंथों के अनुसार इस दिन व्रत, तप और जाप करने से मनुष्य को भौतिक सुख से परे आंतरिक सुख का आभास होता है. मोक्ष की प्राप्ति के लिए 5 मेरू का संकल्प पूरा करना जरूरी होता है. 20 नवकारवली के साथ ऊँ रहीम्, श्रीम् अदिनाथ पारंगत्या नम: मंत्र का जाप करना होता है.

क्‍या करते हैं इस दिन

इस दिन श्रद्धालु निर्जला व्रत रखते हैं. भगवान ऋषभनाथ या ऋषभदेव की प्रतिमा के सामने चांदी के बने 5 मेरू रखे जाते हैं. बीच में एक बड़ा मेरू और उसके चारों ओर 4 छोटे-छोटे मेरू रखे जाते हैं.

चारों मेरू के सामने श्रद्धालु स्वास्तिक का निशान बनाते हैं. उसके बाद ऋषभदेव की पूजा करते हैं. इस मंत्र का जाप करते हैं:
ऊँ ह्रीम श्रीम् ऋषभदेव परमगत्या नम:

किसी मठवासी को दान देने के बाद ही यह व्रत खोला जाता है, इस तरह यह व्रत पूरा होता है.

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