नई दिल्ली। देश में कहीं से भी चांद नजर नहीं आने की वजह से अब ईद शनिवार को मनाई जाएगी. जामा मस्जिद की ‘मरकजी रुयते हिलाल कमेटी’ की बैठक के बाद यह घोषणा की गई कि देश में कहीं चांद नजर नहीं आया है और ऐसे में शुक्रवार को ईद नहीं होगी.

फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने बताया कि देश के किसी भी हिस्से में चांद नहीं दिखा. इसलिए अब ईद शनिवार को होगी. इस बार के रमजान का कल आखिरी रोजा होगा. इस्लामी कैलेंडर के तहत रमजान का महीना पूरा होने पर ईद मनाई जाती है.

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मीठी ईद

मीठी ईद भी कहा जाने वाला यह पर्व खासतौर पर भारतीय समाज के ताने-बाने और उसकी भाईचारे की सदियों पुरानी परंपरा का वाहक है. इस दिन विभिन्न धर्मों के लोग गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे से गले मिलते हैं और सेवइयां अमूमन उनकी तल्खी की कड़वाहट को मिठास में बदल देती हैं. दुनिया में चांद देखकर रोजा रहने और चांद देखकर ईद मनाने की पुरानी परंपरा है और आज के हाईटेक युग में तमाम बहस-मुबाहिसे के बावजूद यह रिवाज कायम है. व्यापक रूप से देखा जाए तो रमजान और उसके बाद ईद व्यक्ति को एक इंसान के रूप में सामाजिक जिम्मेदारियों को अनिवार्य रूप से निभाने का दायित्व भी सौंपती है.

भारत में ईद का त्योहार यहां की गंगा-जमुनी तहजीब के साथ मिलकर उसे और खुशनुमा बनाता है. हर धर्म और वर्ग के लोग इस दिन को तहेदिल से मनाते हैं. ईद के दिन सेवइयों या शीर-खुरमे से मुंह मीठा करने के बाद छोटे-बड़े, अपने-पराए, दोस्त-दुश्मन गले मिलते हैं तो चारों तरफ मोहब्बत ही मोहब्बत नजर आती है. एक पवित्र खुशी से दमकते सभी चेहरे इंसानियत का पैगाम माहौल में फैला देते हैं.