Muharram 2020: इस साल मुहर्रम 20 अगस्त को शुरू हो रहा है और 18 सितंबर को यह समाप्त होगा. मुहर्रम इस्लाम का महीना और इससे इस्लाम धर्म के नए साल की शुरुआत होती है. लेकिन 10वें मुहर्रम को हजरत इमाम हुसैन की याद में मुस्लिम मातम मनाते हैं. मान्यताएं है कि इस महीने की 10 तारीख को इमाम हुसैन की शहादत हुई थी, जिसके चलते इस दिन को रोज-ए-आशुरा कहा जाता है. मुहर्रम का यह सबसे अहम दिन माना गया है. इस दिन जुलूस निकालकर हुसैन की शहादत को याद किया जाता है. 10वें मुहर्रम पर रोज़ा रखने की भी परंपरा है. Also Read - ताजिया जुलूस केस: इंदौर में पूर्व पार्षद समेत 5 लोग NSA के तहत भेजे गए जेल

इस्‍लाम धर्म के नए साल की शुरुआत मोहर्रम महीने से होती है, यानी कि मुहर्रम का महीना इस्‍लामी साल का पहला महीना होता है, इसे हिजरी भी कहा जाता है. मुहर्रम के दिन सड़कों पर जुलूस भी निकाला जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन मुहर्रम अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक होता है. Also Read - Muharram Mutton Khichda Haleem Recipe: मुहर्रम में घर पर बनाएं स्पेशल मटन खिचड़ा, ये है रेसिपि

क्‍यों मनाया जाता है मुहर्रम?
इस्लाम में जो मान्यताएं हैं उनके अनुसार इराक में यजीद नाम का जालिम बादशाह इंसानियत का दुश्मन था, यजीज खुद को खलीफा मानता था. हालांकि उसको अल्लाह पर भरोसा नहीं था औऱ वो चाहत रखता था कि हजरत इमाम हुसैन उसके खेमें में शामि हो जाएं. लेकिन हुसैन को ये मंजूर नहीं था औऱ उन्होंने यजीद के खिाफ युद्ध छेड़ दिया. पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन को कर्बला में परिवार औऱ दोस्तों के साथ शहीद कर दिया गया था. जिस महीने हुसैन औऱ उनके परिवार को शहीद किया गाय था वह मुहर्रम का ही महीना था. Also Read - Muharram/Ashura 2020: जंजीरों, कोड़ों से खुद को क्यों लहूलुहान कर लेते हैं शिया मुस्लिम, इस दर्द की वजह क्या है?

क्या है इसका महत्व
मुहर्रम मातम मनाने और धर्म की रक्षा करने वाले हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करने का दिन है. इस महीने में मुसलाम शोक मनाते हैं और अपनी खुशी का त्याद करते हैं. मान्यताओं के अमुसार बादशाह यजीद ने अपनी सत्ता कायम करने के लिए हुसैन और उनके परिवार वालों पर जुल्म किया और 10 मुहर्रम को उन्हें बेदर्दी से मौत के घाट उतार दिया. दरअसल हुसैन का मकसद था खुद को मिटाकर भी इस्लान और इंसानियत को हमेशा जिंदा रखना. यह धर्म युद्ध इतिहास के पन्‍नों पर हमेशा-हमेशा के लिए दर्ज हो गया.

कैसे मनाया जाता है मुहर्रम
मुहर्रम खुशियों का त्‍योहार नहीं बल्‍कि मातम और आंसू बहाने का महीना है. शिया समुदाय के लोग 10 मुहर्रम के दिन काले कपड़े पहनकर हुसैन और उनके परिवार की शहादत को याद करते हैं. हुसैन की शहादत को याद करते हुए सड़कों पर जुलूस निकाला जाता है और मातम मनाया जाता है. मुहर्रम की नौ और 10 तारीख को मुसलमान रोजे रखते हैं और मस्जिदों-घरों में इबादत की जाती है. वहीं सुन्‍नी समुदाय के लोग मुहर्रम के महीने में 10 दिन तक रोजे रखते हैं. कहा जाता है कि मुहर्रम के एक रोजे का सबाब 30 रोजों के बराबर मिलता है.