Mundan Ceremony Why Is Swastika Made On The Head After The Mundan Ceremony Know Its Religious Significance
मुंडन संस्कार के बाद सिर पर क्यों बनाया जाता है स्वास्तिक? जानिए इसका धार्मिक महत्व
Mundan Ceremony: हिंदू धर्म में मुंडन संस्कार का विशेष महत्व बताया गया है और बच्चे के जन्म के बाद विधि-विधान से यह संस्कार कराया जाता है. इसके बाद बच्चे के खाली सिर पर स्वास्तिक बनाया जाता है.
Mundan Ceremony: सनातन धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक 16 संस्कार बताए गए हैं और मुंडन भी इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण संस्कार है. बच्चे के जन्म के समय उसके सिर पर बाल होते हैं और जब पहली बार उन बालों का काटा जाता है तो उसे मुंडन संस्कार कहते हैं. जो कि बच्चे के जन्म के बाद 1 से 3 साल की उम्र के बीच किया जाता है. मुंडन के बाद बच्चे के खाली सिर पर स्वास्तिक बनाया जाता है. मुंडन संस्कार का पूर्वजन्म व पूर्व योनियों से भी खास संबंध होता है. आइए जानते हैं मुंडन का पूर्व योनियों से क्या रिश्ता है ओर क्यों इसके बाद सिर पर स्वास्तिक बनाया जाता है?
क्यों किया जाता है मुंडन संस्कार?
वैज्ञानिकों की मानें तो गर्भ के बाल कीटाणुओं और गंदगी से भरे होते हैं और इन्हें जड़ सक काटकर अशुद्धियों को दूर किया जाता है. वहीं घर के बुजुर्ग कहते हैं कि बच्चे के जन्म के बाद उसे तब तक बाहर नहीं निकाला जाता जब तक उसका मुंडन न हो जाए. क्योंकि बिना मुंडन के बच्चे को बाहर निकालने पर नजर लगने पर निगेटिविटी का खतरा रहता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गर्भ में पल रहे बच्चे के सिर पर जो बाल होते हैं वे कई योनियों से गुजरकर वर्तमान जीवन में आते हैं और अपने साथ निगेटिव एनर्जी भी लाते हैं. इसलिए बच्चे का मुंडन संस्कार किया जाता है ताकि पूर्व जन्मों से छुटकारा मिल जाए.
मुंडन के बाद सिर पर हल्दी का लेप लगाया जाता है और इसे बहुत ही शुभ माना गया है. हल्दी का संबंध बृहस्पति ग्रह से है और मांगलिक कार्यों में हल्दी का उपयोग करने से गुरु ग्रह मजबूत होता है. कहते हैं कि मुंडन के बाद बच्चे के सिर पर हल्दी का लेप इसलिए लगाया जाता है ताकि उसका जीवन शुभ हो और आस-पास पॉजिटिविटी रहे. इसके अलावा हल्दी को एंटी सेप्टिक भी कहा जाता है और मुंडन के बाद इसे सिर पर लगाने से फोड़े-फुंसी का डर नहीं रहता. मुंडन के बाद बच्चे सिर पर हल्दी से स्वास्तिक बनाया जाता है और हिंदू धर्म में स्वास्तिक को शुभ माना गया है. यह स्वास्तिक उस जगह बनाया जाता है जहां सहस्रार चक्र होता है. इससे बच्चे का दिमाग केंद्रित होता है और स्वास्तिक चारों दिशाओं की उर्जा को आकर्षित करने का काम करता है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें Astrology की और अन्य ताजा-तरीन खबरें
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.