उज्जैन: मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के ऊपरी तल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट मंगलवार को खुलेंगे. ये पट 24 घंटे तक खुले रहेंगे. यह ऐसा मंदिर है, जिसके पट साल में एक बार नागपंचमी के मौके पर खुलते हैं. मंदिर प्रबंधन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, मंगलवार रात्रि 12 बजे विशेष पूजा अर्चना के साथ भक्तों के लिए मंदिर के पट खुल जाएंगे और नागचंद्रेश्वर महादेव के लगातार चौबीस घंटे दर्शन होंगे. मंदिर के पट बुधवार रात 12 बजे बंद होंगे. Also Read - कोरोना महामारी में अभिभावकों को खोने वाले बच्‍चों को हर माह 5 हजार रुपए की पेंशन म‍िलेगी, एमपी के CM की घोषणा

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प्रशासन ने व्यापक व्यवस्थाएं की

इस दौरान हजारों श्रद्घालु भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन करेंगे. इसे देखते हुए प्रशासन ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं. नागपंचमी पर्व पर पट खुलने के पश्चात महंत प्रकाशपुरी एवं जिलाधिकारी व महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति अध्यक्ष मनीष सिंह द्वारा पूजन किया जाएगा. शासकीय पूजन 15 अगस्त अपराह्न 12 बजे होगा. महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा 15 अगस्त को श्री महाकालेश्वर भगवान की सायं आरती के पश्चात पूजन किया जाएगा.

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यहां शिव-पार्वती हैं सर्प शय्या पर हैं विराजमान

उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के बारे में मान्यता है कि नागराज तक्षक स्वयं मंदिर में रहते हैं. नागचंद्रेश्वर मंदिर में 11वीं शताब्दी की प्रतिमा लगी है. प्रतिमा में में फन फैलाए नाग के आसन पर शिव-पार्वती बैठे हैं. बताया जाता है कि यह प्रतिमा नेपाल से यहां लाई गई थी. पूरी दुनिया में यह एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां भगवान विष्णु की तरह ही शिव-पार्वती सर्प शय्या पर विराजमान हैं. कहा जाता है कि सर्पराज तक्षक ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की थी. तपस्या से प्रसन्न हुए भगवान शिव ने सर्पों के राजा तक्षक को अमरत्व का वरदान दिया था. मान्यता है कि उसके बाद से ही नागराज तक्षक ने महाकाल के सानिध्य में वास करना शुरू कर दिया. वहीं भगवान शिव की तपस्या में विघ्न ना हो, इस कारण से केवल नागपंचमी के दिन ही मंदिर के पट खुलते हैं.