Narak Chaturdashi 2019 के दिन यम दीपक जलाया जाता है. इस दिन का काफी महत्‍व है.

पर क्‍या आप जानते हैं कि नरक चतुर्दशी का पर्व क्‍यों मनाया जाता है. इसके पीछे कथा क्‍या है.

कथा 1
राक्षस नरकासुर का वध
पुरातन काल में नरकासुर नाम का राक्षस था. उसने अपनी शक्तियों से देवता और साधु संतों को परेशान कर दिया था.

नरकासुर का अत्याचार इतना बढ़ने लगा कि उसने देवता और संतों की 16 हजार स्त्रियों को बंधक बना लिया.

नरकासुर के अत्याचारों से परेशान होकर समस्त देवता और साधु-संत भगवान श्री कृष्ण की शरण में गए. श्री कृष्ण ने सभी को नरकासुर के आतंक से मुक्ति दिलाने का आश्वासन दिया.

Narak Chaturdashi 2019: नरक चतुर्दशी पर क्‍यों जलाया जाता है यम दीपक, महत्‍व, दीपदान-स्‍नान का शुभ मुहूर्त…

नरकासुर को स्त्री के हाथों से मरने का श्राप था इसलिए भगवान श्री कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की मदद से कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर का वध किया और उसकी कैद से 16 हजार स्त्रियों को आजाद कराया. बाद में ये सभी स्त्री भगवान श्री कृष्ण की 16 हजार पट रानियां के नाम से जानी जाने लगी.

नरकासुर के वध के बाद लोगों ने कार्तिक मास की अमावस्या को अपने घरों में दीये जलाए और तभी से नरक चतुर्दशी और दीपावली का त्यौहार मनाया जाने लगा.

कथा 2 
एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, दैत्यराज बलि को भगवान श्री कृष्ण द्वारा मिले वरदान का उल्लेख मिलता है. मान्यता है कि भगवान विष्णु ने वामन अवतार के समय त्रयोदशी से अमावस्या की अवधि के बीच दैत्यराज बलि के राज्य को 3 कदम में नाप दिया था.

राजा बलि जो कि परम दानी थे, उन्होंने यह देखकर अपना समस्त राज्य भगवान वामन को दान कर दिया. इसके बाद भगवान वामन ने बलि से वरदान मांगने को कहा.

दैत्यराज बलि ने कहा कि हे प्रभु, त्रयोदशी से अमावस्या की अवधि में इन तीनों दिनों में हर वर्ष मेरा राज्य रहना चाहिए. इस दौरान जो मनुष्य में मेरे राज्य में दीपावली मनाए उसके घर में लक्ष्मी का वास हो और चतुर्दशी के दिन नरक के लिए दीपों का दान करे, उनके सभी पितर नरक में ना रहें और ना उन्हें यमराज यातना दें.

राजा बलि की बात सुनकर भगवान वामन प्रसन्न हुए और उन्हें वरदान दिया. इस वरदान के बाद से ही नरक चतुर्दशी व्रत, पूजन शुरू हुआ.

कैसे करें दीप दान
घर के सबसे बड़े सदस्‍य को यम के नाम का एक बड़ा दीपक जलाना चाहिए. इसके बाद इस दीये को पूरे घर में घुमाएं. अब घर से बाहर दूर इस दीये को रख आएं. घर के दूसरे सदस्‍य घर के अंदर ही रहें और इस दीपक को न देखें.

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