Naraka Chaturdashi, Choti Diwali 2018 date and time: दशहरा के साथ ही देश में त्योहारों का मौसम शुरू हो गया है. अब 7 नवंबर को दिवाली का पर्व है. दिवाली से एक दिन पहले छोटी दिवाली मनाई जाती है. छोटी दीपावली 6 नवंबर को है. छोटी दिवाली को लोग नरक चतुर्दशी के नाम से भी जानते हैं. कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी यानी कि चौदहवें दिन आने वाले त्योहार को नरक चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है. इसे रूप चौदस भी कहा जाता है.

जानिये, इस दिन का इतना महत्व क्यों है और इस दिन पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त क्या है. साथ ही यह भी जानिये कि नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली को होने वाली पूजा की सरल विधि क्या है.

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सबसे पहले जानिये नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली की तिथि और शुभ मुहूर्त क्या है.

छोटी दिवाली शुभ मुहूर्त और तिथि:

अभ्यंग स्नान मुहूर्त: सुबह 05:08 से 06:44
चतुर्दशी तिथि शुरू कब से : 5 नवंबर को रात 11:46 बजे से
चतुर्दशी तिथि कब खत्म हो रही है : 6 नवंबर को रात 10:27 बजे तक

यम पूजा के लिए शुभ मुहूर्त

सुबह: 6 नवंबर को 9:32 से 11:45 तक
दोपहर: 6 नवंबर को 12:05 से 1:22 तक
शाम: 6 नवंबर को 05:40 से 7:05 तक

छोटी दिवाली 2018: नरक चतुर्दशी का महत्व

छोटी दिवाली को दीपावली के एक दिन पहले मनाया जाता है. देश के बहुत से क्षेत्रों में इसे नरक चतुर्दशी के नाम से मनाया जाता है. दरअसल, नरकासुर नाम के असुर और भगवान कृष्ण के बीच हुए युद्ध के कारण इस दिन नरक चतुर्दशी की पूजा होती है. शास्त्रों के अनुसार नरकासुर नाम के राक्षस ने 16,000 कन्याओं को अपने बंधक में रखा था. भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध कर उन सभी कन्याओं को मुक्त करवाया.

लेकिन वहां से मुक्त होने के बाद सभी कन्याओं के मन में इस बात का डर था कि क्या उन्हें समाज स्वीकार करेगा, उनका भविष्य क्या होगा? इस उलझन को लेकर वो भगवान श्री कृष्ण के पास गईं और अपने मन की बात कही. सभी कन्याओं ने कहा कि कृष्ण अब तुम ही हमें कुछ सुझाव दो.

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इस पर भगवान श्रीकृष्ण और उनकी पत्नी सत्यभामा ने यह सुझाव दिया कि उन सभी लड़कियों को श्री कृष्ण से विवाह कर लेनी चाहिए, इसके बाद उन्हें कृष्ण की पत्नी के रूप में पहचाना जाएगा. छोटी दिवाली के मौके पर लोग गंगा स्नान करते हैं या अभ्यंग स्नान करते हैं. शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि इस दिन गंगा स्नान से जातक के सभी पाप मिट जाते हैं और वह नरक में जाने से बच जाता है.

इस दिन लोग तिल या सीसम तेल का उबटन लगाते हैं और इसके बाद स्नान करते हैं. स्नान के बाद लोग नये कपड़े पहनते हैं, पूजन करते हैं और उसके बाद भोजन ग्रहण करते हैं. महाराष्ट्र में इस दिन घर पूरन पोली और मिसल पाव तैयार किया जाता है. शाम में लोग घर को दीया से सजाते हैं और मिठाइयां खाते हैं.

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