Navratri 2018 9th Day: नवरात्रि के अंतिम दिन यानी 9वें दिन नवदुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा होती है. नवदुर्गा में मां सिद्धिदात्री का स्वरूप अंतिम और 9वां स्वरूप है. यह समस्त वरदानों और सिद्धियों को देने वाली मां हैं. मां कमल के पुष्प पर विराजमान हैं और इनके हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म है. यक्ष, गंधर्व, किन्नर, नाग, देवी-देवता और मनुष्य सभी इनकी कृपा से सिद्धियों को प्राप्त करते हैं. इनका स्वरूप मां सरस्वती का भी स्वरूप माना जाता है. इनकी कृपा से विद्या, बुद्धि की प्राप्ति होती है. इस बार नवरात्रि का अंतिम दिन 29 अक्टूबर को होगा. Also Read - दशहरा जुलूस के दौरान हुआ पथराव, इलाके में तनाव के बीच लगाई गई कर्फ्यू, इंटरनेट बंद

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इस दिन मां सिद्धिदात्री की उपासना करने से नवरात्रि के 9 दिनों का फल भक्त को प्राप्त हो जाता है. इसी दिन महानवमी की पूजा भी की जाती है. इसको करने से जीवन में सफलता और विजय प्राप्त होती है. इस दिन देवी की उपासना अवश्य करें. इस दिन के विशेष हवन से व्यक्ति अपनी मनोकामनाओं को पूरा कर सकता है.

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शास्त्रों के अनुसार पूजा का महत्व

शास्त्रों के अनुसार ऐसी मान्यता है कि मां पार्वती ने महिषासुर नामक राक्षस को मारने के लिए दुर्गा का रूप लिया था. महिषासुर एक राक्षस था जिससे मुकाबला करना सभी देवताओं के लिए मुश्किल हो गया था. इसलिए आदिशक्ति ने दुर्गा का रुप धारण किया और महिषासुर से 8 दिनों तक युद्ध किया और नौवें दिन महिषासुर का वध कर दिया. उसके बाद से नवरात्रि का पूजन किया जाने लगा. नौवें दिन को महानवमी के दिन से जाना जाने लगा.

इनकी पूजा से इससे यश, बल और धन की प्राप्ति होती है. सिद्धिदात्री देवी उन सभी भक्तों को महाविद्याओं की अष्ट सिद्धियां प्रदान करती हैं, जो सच्चे मन से उनके लिए आराधना करते हैं. मान्यता है कि सभी देवी-देवताओं को भी मां सिद्धिदात्री से ही सिद्धियों की प्राप्ति हुई है.

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सिद्धिदात्री पूजन विधि:

1. सबसे पहले कलश की पूजा करें और सभी देवी देवताओं की पूजा करें.

2. इसके बाद मां सिद्धिदात्री के मंत्रों का जाप करते हुए पूजन करें. मां के इस मंत्र का जाप करें ‘सिद्धगन्‍धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि,

सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।’

3. इस दिन मां सिद्धिदात्री को नौ प्रकार के पुष्प और नौ प्रकार के फल चढ़ाएं जाते हैं. नवरस युक्त भोजन और नवाह्न प्रसाद होता है.

4. मां सिद्धिदात्री की आरती करें.

5. कन्याओं का पूजन करें और उन्हें भोजन कराएं.

6. हवन करें. मां सिद्धदात्री की पूजा में हवन करने के लिए दुर्गा सप्तशती के सभी श्लोकों का प्रयोग किया जा सकता है.

मां सिद्धिदात्री की आरती

जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता

तू भक्तो की रक्षक तू दासो की माता,

तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि

तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि!!

कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम

जभी हाथ सेवक के सर धरती हो तुम,

तेरी पूजा मैं तो न कोई विधि है

तू जगदम्बें दाती तू सर्वसिद्धि है!!

रविवार को तेरा सुमरिन करे जो

तेरी मूर्ति को ही मन मैं धरे जो,

तू सब काज उसके कराती हो पूरे

कभी काम उस के रहे न अधूरे!!

तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया

रखे जिसके सर पैर मैया अपनी छाया,

सर्व सिद्धि दाती वो है भागयशाली

जो है तेरे दर का ही अम्बें सवाली!!

हिमाचल है पर्वत जहाँ वास तेरा

महा नंदा मंदिर मैं है वास तेरा,

मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता

वंदना है सवाली तू जिसकी दाता!!

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