नई दिल्ली. शक्ति उपासना का पर्व नवरात्र या दुर्गा पूजा या दशहरा, कल से शुरू हो रहा है. कलश स्थापना से लेकर नौ दिनों तक की पूजा के बाद 10वें दिन मूर्ति विसर्जन तक, देशभर में श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा-आराधना में तल्लीन रहेंगे. लेकिन क्या आपको मालूम है कि दशहरा अगर 10 दिनों का है तो इस त्योहार को नवरात्र क्यों कहते हैं? क्या मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना करने या 9 दिनों तक पूजा का माहात्म्य होने के कारण इसे नवरात्र कहा जाता है? या फिर इसके पीछे कोई सटीक धार्मिक कथा है? आइए आज जानते हैं नवरात्र के इस त्योहार का मतलब. जानते हैं मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों-अवतारों की कहानी.

हिन्दू धर्म में नवरात्रि का त्योहार साल में दो बार, बसंत ऋतु में और शरद ऋतु में मनाया जाता है. अप्रैल में होने वाली नवरात्रि पूजा को चैत्र नवरात्र कहते हैं. वहीं सितंबर-अक्टूबर यानी आश्विन मास में होने वाली नवरात्रि को शारदीय नवरात्र कहा जाता है. दरअसल, नवरात्र का सामान्य अर्थ होता है- नव मतलब 9 और रात्र का तात्पर्य यहां समय विशेष से है. यानी 9 दिनों की विशेष अवधि ही नवरात्र है. वहीं, पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि माता पार्वती ने भगवान शिव से इस बारे में पूछा था तो उन्होंने इसके प्रयोजन का उद्देश्य बताया था. भगवान शिव ने कहा था-

नव शक्तिभिः संयुक्तं नवरात्रं तदुच्यते
एकैब देव-देवेशि नवधा परितिष्ठता।।

यानी नवरात्र नौ शक्तियों का एक अनुष्ठान है, जिसमें 9 शक्तियों के अलग-अलग रूपों की प्रतिदिन पूजा की जाती है. मार्कंडेय पुराण के अनुसार इन नौ शक्तियों में शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री हैं. नवरात्र की इस व्याख्या को ही सबसे ज्यादा मान्यता प्राप्त है. जैसा कि आप जानते भी होंगे नवरात्र के पूरे 9 दिनों में मां दुर्गा के इन्हीं शक्ति रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. दुर्गा पूजा के दौरान हम जिस दुर्गा-सप्तशती का पाठ करते हैं, उसका विस्तृत वर्णन मार्कंडेय पुराण में किया गया है. इसके अनुसार माता के इन सभी रूपों की अलग-अलग कहानियां हैं. आपने यह श्लोक पढ़ा भी होगा-

प्रथमं शैलपुत्री च दि्वतीयं ब्रह्मचारिणी
तृतीयं चंद्रघंटेति कूष्मांडेति चतुर्थकम्।।
पंचमं स्कंदमातेति षष्ठम् कात्यायनीति च
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टकम्।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिता।।

इस श्लोक के अलावा नवरात्र के 9 दिनों में देवी के जिन-जिन रूपों की पूजा की जाती है, उसका वर्णन इस प्रकार है.

Shailputri

पहला नवरात्र – महाकाली ने मधु-कैटभ नामक दो राक्षसों का संहार कर भगवान विष्णु की रक्षा की थी.

Brahmcharini
दूसरा नवरात्र – मनुष्य और देवता, सभी महिषासुर नामक राक्षस के आतंक से परेशान थे. उसके विनाश के लिए सभी देवताओं ने मिलकर एक तेजपुंज को प्रकट किया, जिन्हें देवी दुर्गा कहा गया. उन्होंने महिषासुर का अंत कर देवताओं और मनुष्यों की रक्षा की.

Chandraghanta
तीसरा नवरात्र – भगवान विष्णु की इच्छा से प्रकट हुईं देवी सरस्वती ने शुंभ-निशुंभ नामक दो राक्षसों का संहार किया.

Kushmanda
चौथा नवरात्र – इस दिन का संबंध योगमाया से है. वही योगमाया जो मथुरा में भगवान कृष्ण के जन्म के समय यशोदा के गर्भ से जन्मी थीं. कंस के हाथों मारे जाने से पहले ही यह देवी आकाश में विलीन हो गई थीं.

Skandmata
पांचवां नवरात्र – दुर्गा की इस शक्ति का नाम रक्तदंतिका भी है. असुरों के सर्वनाश के लिए दुर्गा ने यह रूप धारण किया था.

Katyayani
छठा नवरात्र – दशहरे के छठे दिन देवी शाकंभरी की पूजा की जाती है. यह देवी सुख-समृद्धि, धन-धान्य और शांति की महाशक्ति हैं. पौराणिक कथा है कि जब पृथ्वी पर सौ वर्षों तक अकाल की स्थिति आ गई, तब देवताओं के अनुरोध पर शाकंभरी देवी ने प्राणियों और देवताओं की रक्षा की थी.

KaalRatri
सातवां नवरात्र – वस्तुतः नवरात्र में इसी दिन से दुर्गा की विधिवत पूजा शुरू होती है. पौराणिक कथा के अनुसार देवी दुर्गा ने दुर्गम नामक राक्षस का संहार कर पृथ्वी के प्राणियों और देवताओं की रक्षा की थी. दुर्गम नामक असुर का विनाश करने के कारण ही देवी का नाम दुर्गा पड़ा.

Mahagauri
आठवां नवरात्र – यह तिथि शक्ति के आठवें रूप यानी भ्रामरी देवी के लिए निश्चित है. पुराण के अनुसार जब देवताओं की पत्नियों का सतीत्व एक राक्षस के कारण खतरे में पड़ा तो देवी ने भ्रामरी रूप में अवतार लेकर इन महिलाओं की रक्षा की थी. इस दिन की पूजा का इसलिए विशेष महत्व है.

Siddhidatri
नौवां नवरात्र – शक्ति की उपासना का यह अंतिम दिन होता है. इस दिन चंडिका देवी की पूजा की जाती है. इस दिन के बारे में कथा है कि चंड-मुंड नामक राक्षसों के प्रकोप से प्राणियों और देवताओं को मुक्ति दिलाने के लिए मां दुर्गा ने चंडिका रूप धारण किया था.

(साभारः राजेश्वरी शांडिल्य लिखित पुस्तक ‘भारतीय पर्व एवं त्योहार’.)

दुर्गा पूजा से जुड़ी खबरों के लिए पढ़ते रहें India.com