हिंदू धर्म में भगवान की पूजा करते समय समय कई सार नियमों का पालन करना बेहद अनिवार्य होता है. शारदीय नवरात्रि चल रही है और इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की विशेष पूजा की जाती है.माता रानी के लिए नौ दिन तक व्रत किए जाते हैं और मां को प्रसन्न करने के कई उपाय भी किए जाते हैं, जिनमे से एक है माता रानी को पान के पत्ते चढ़ाना.Also Read - बंगाल में मूर्ति विसर्जन के बाद लोगों पर देसी बम फेंके गए, मध्य प्रदेश में जुलूस में कार घुसाई

मां दुर्गा की आराधना में पान का विशेष महत्व होता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार कहते हैं मां दुर्गा ने आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन महिषासुर के वध से पहले शहद भरे पान के पत्ते का सेवन किया था इसलिए माता रानी की पूजा में पान चढ़ाया जाता है, पान माता रानी को अत्यंत प्रिय है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि माता की पूजा में आपको पान चढ़ाते वक्त चकिन चीजों का ध्यान रखना चाहिए. Also Read - Attacks on Hindu Temples in Bangladesh: इस्कॉन ने PM मोदी से की अपील, कहा- हिंंसा रुकवाने बांग्लादेश में भेजें प्रतिनिधिमंडल

देवी मां को पान के साथ अर्पण करें ये चीजें
पूजन में पान का पत्ता रखना अत्‍यंत शुभ होता है, ध्यान रखें पान के पत्ते का सथ इलाइची,लौंग,गुलकंद आदि भी चढ़ाया जाता है. मानय्ता है कि पूरा बना हुआ पान चढ़ाया जाए तो मातारानी बेहद प्रसन्न हो जाती हैं और जातक के जीवन में सुख समृद्धि का वास रहता है. इसलिए देवी भगवती की पूजा में पान जरुर चढ़ाना चाहिए. Also Read - Bangladesh: दुर्गा पूजा के दौरान मंदिरों पर हमला, तीन लोगों की मौत; 22 जिलों में अर्द्धसैनिक बल तैनात

पान के विशेष प्रयोग के लिए किन बातों का ध्यान रखें?
पान का पत्ता पूरा होना चाहिए और इसमें डंठल लगी होनी चाहिए. पान का पत्ता कहीं से भी कटा-फटा न हो. पूजा और प्रयोग के लिए हरे पान का पत्ता ही प्रयोग करें.

शीघ्र विवाह के लिये पान के पत्ते का प्रयोग
सिन्दूर को घी में मिलाकर पेस्ट बना लें. पान के पत्ते पर चिकनी तरह इस पेस्ट से अपना नाम लिखें. इसको चिकनी तरफ से ही देवी को अर्पित करें. ये प्रयोग नवरात्रि में लगातार तीन दिन करें.

धन लाभ के लिये पान के पत्ते का प्रयोग
नवरात्रि में रोज शाम को मां लक्ष्मी की कपूर से आरती करें. इसके बाद पान के पत्ते पर गुलाब की पंखुड़ियां रखकर उन्हें अर्पित करें. नवरात्रि के बाद ये प्रयोग हर पूर्णिमा की रात्रि को करते रहें.