Navratri Navmi 2018: नवरात्रि के आखिरी दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा की जाती है. इस बार अष्टमी 17 अक्टूबर को और नवमी 18 अक्टूबर को है. नवरात्रि आखिरी दो दिनों में मां दुर्गा के भक्त कन्या पूजन करते हैं. कुछ लोग अष्टमी को तो कुछ लोग नवमी को कन्या पूजन करते हैं. नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ ही चंडी होम किया जाता है, जिसे चंडी होमम हवन भी कहा जाता है. नवरात्रि के आखिरी दिन चंडी होम कराने से घर में सुख, शांति और सेहत बनी रहती हैं. Also Read - अयोध्या में नवरात्रि के दौरान भक्त मानस भवन में करेंगे रामलला के दर्शन

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1. सबसे पहले हवन कुंड को साफ कर उसे गोबर से लीप लें.

2. वेदी के बीच में से दक्षिण से उत्तरी दिशा की ओर ले जाते हुए तीन रेखाएं खींचे.

3. अब अनामिका अंगूली से या अंगूठे की मदद से हवन कुंड से कुछ मिट्टी बाहर की ओर फेंक दें.

4. हवन कुंड में गंगाजल का छिड़काव कर उसे शुद्ध करें.

5. अब कुंड में आम की लकड़ी रखें और अग्नि प्रज्वलित करें. घी की आहुति देने के साथ इन मंत्रों का जाप करें:

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ॐ प्रजापतये स्वाहा। इदं प्रजापतये न मम।

ॐ इन्द्राय स्वाहा। इदं इन्द्राय न मम।

ॐ अग्नये स्वाहा। इदं अग्नये न मम।

ॐ सोमाय स्वाहा। इदं सोमाय न मम।

ॐ भूः स्वाहा। इदं अग्नेय न मम।

ॐ भुवः स्वाहा। इदं वायवे न मम।

ॐ स्वः स्वाहा। इदं सूर्याय न मम।

ॐ ब्रह्मणे स्वाहा। इदं ब्रह्मणे न मम।

ॐ विष्णवे स्वाहा। इदं विष्णवे न मम।

ॐ श्रियै स्वाहा। इदं श्रियै न मम।

ॐ षोडश मातृभ्यो स्वाहा। इदं मातृभ्यः न मम॥

हवन का शुभ मुहूर्त :

नवमीं के दिन हवन का समय – सुबह 06:28 से दोपहर 3:28 तक

हवन करने का पूरा समय – 9 घंटे

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